अभी और बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

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आसमान छूते पेट्रोल और डीजल के दाम 2026 तक नहीं गिरनेवाले हैं । भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद सिंह ने एक बयान जारी कर इस मामले में मोदी सरकार का पक्ष रखने की कोशिश की है । इस बयान में दिये गए हिसाब-किताब से ये साफ हो चला है कि पेट्रोल और डीजल के दाम को कम करना अब सरकार के बस की बात नहीं रही है । भाजपा नेता की माने तो इन स्थितियों के लिए यूपीए सरकार जिम्मेवार है। उधर, भाजपा नेता के दावों पर कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने हाथ जोड़ लिए।

केंद्र सरकार को चुकाना है 1 लाख 30 हजार करोड़ का ऑयल बॉन्ड

केन्द्र सरकार ने 2005 से लेकर 2009 के बीच 4 लाख करोड़ रुपए का ऑयल बॉन्ड इश्यू किया था । ऑयल बॉन्ड इश्यू करने का आसान शब्दों में मतलब ये है कि किसी सामान की खरीद पर नकद पेमेंट नहीं कर इसके बदले एक लेटर पर लिखकर दे देना की आनेवाले सालों में सूद समेत पूरी कीमत दी जाएगी । रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार सरकार कंपनियों को भी स्पेशल बॉन्ड इश्यू कर सकती है । मतलब अगर सरकार चाहे तो नकद पेमेंट की जगह किसी कंपनी को बॉन्ड में पेमेंट कर सकती है । इससे सरकार को ये फायदा है कि उससे तुरंत कैश नहीं देना होगा ।

इन बॉन्ड्स को एक निश्चित अवधि के लिए इश्यू किया गया था । ये वो वक्त था जब ऑयल पर सब्सिडी मिलती थी । मतलब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रेट कुछ भी हो सरकार अपने हिसाब से रेट तय करती थी । 2008 की वैश्विक मंदी में जब तेल कंपनियों की हालत खराब हुई तो उन्होंने सरकार से ऑयल बॉन्ड की जगह कैश मांगना शुरू किया और फिर 2010 में ऑयल बॉन्ड पेमेंट सिस्टम बंद कर दिया गया । 2005 से 2009 के बीच जो बॉन्ड इश्यू किए गए थे। उनकी अवधि 2022 से 2026 के बीच पूरी हो रही है। इसकी कीमत तकरीबन 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपए है । मतलब अभी तो मुश्किल शुरू हुई है ।

एनडीए सरकार ने 3,500 करोड़ का किया है ब्याज भुगतान

जून 2010 में केन्द्र सरकार ने पेट्रोल के दाम को बाजार पर छोड़ दिया । इसके बाद अक्टूबर 2014 में डीजल पर भी यही व्यवस्था लागू कर दी गई । 2017 से तेल कंपनियां तेल की कीमत तय करने लगी । सरकार के उपर से सब्सिडी का बोझ खत्म हो गया। लेकिन 2005 से 2009 की बीच जो ऑयल बॉन्ड इश्यू किये गए उनकी देनदारी अब भी बनी हुई है । 2015 में केन्द्र सरकार ने 3,500 करोड़ के 2 ऑयल बॉन्ड जिनकी अवधि पूरी हो चुकी थी। उनकी रकम तेल कंपनियों को चुका दी है । लेकिन, अब भी सरकार पर 1 लाख 30 हजार करोड़ की देनदारी बाकी है । इन कर्जो को चुकाने के लिए सरकार जाहिर तौर पर टैक्स बढाएगी और इसलिए पेट्रोल और डीजल के दामों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाया जा रहा ।

ऑयल बॉन्ड इशू करना यूपीए का पाप

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद सिंह ने इस मामले को उठाया है । पेट्रोल -डीजल के बढ़ते दामों पर केन्द्र सरकार की बढ़ती फजीहत पर बोलते हुए भाजपा प्रवक्ता ने इसे कांग्रेस और यूपीए सरकार का पाप बताया है । भाजपा प्रवक्ता की माने तो देश की जनता को पेट्रोल -डीजल के दामों से जो परेशानी हो रही है। उसकी असल वजह कांग्रेस ही है ।

कांग्रेस प्रवक्ता ने जोड़े हाथ

अरविंद सिंह के इन आरोपों पर भास्कर ने कांग्रेस के एक प्रदेश प्रवक्ता और विधानपार्षद से प्रतिक्रिया मांगी । अजब बात ये रही कि कांग्रेस नेता ने भाजपा प्रवक्ता के बयानों का जबाब देने की बजाय हाथ जोड़ने लगे । कांग्रेस नेता ने भाजपा प्रवक्ता के बयान को स्तरहीन बताते हुए इस पर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया । कांग्रेस नेता ने ऑयल बॉन्ड इश्यू करने से जुड़े विषय को भी मानने से इंकार कर दिया ।

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