क्या आप भोजपुरी के शेक्सपीयर जो जानते है।नही तो इस खबर को पढ़िए

0
635
Share

गवना कराए सईया घर बैठेला अपना लुभईले परदेश रे बिदेसिया,चढ़ल जवानी बैरण भईली हमरे के मोरा हरीहे हलेष रे विदेशिया,

भोजपुरी शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर कि आज जयंती है और उनसे जुड़ी हुई 10 बड़ी बातें हम आपको बताने जा रहे हैं भिखारी ठाकुर का जन्म 18 दिसंबर साल अट्ठारह सौ सतासी को मूलत बिहार के छपरा के गांव कुतुबपुर के एक हजाम परिवार में हुआ था भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व में कई आश्चर्यजनक खासियत थी महज अक्षर भर ज्ञान बावजूद उन्हें पूरा रामचरितमानस कंठस्थ याद था शुरुआती जीवन में भिखारी ठाकुर रोजी रोटी के लिए अपना गांव घर छोड़कर खड़कपुर चले गए थे कुछ वक्त को रोजी-रोटी में लगे रहे लेकिन तकरीबन 30 साल तक उन्होंने अपना पुश्तैनी पारंपरिक पेशा भी नहीं छोड़ा ठाकुर ने अपने गांव लौट लोक कलाकारों की एक नृत्य मंडली भी बनाई और रामलीला की शुरुआत की बहुआयामी प्रतिभा के धनी भिखारी ठाकुर के एक लोक कलाकार साथ-साथ कवि गीतकार नाटक निर्देशक लोक संगीत और अभिनेता भी थे उनकी मातृभाषा भोजपुरी थी और उन्हें भोजपुरी को ही अपने काव्य और नाटक की भाषा बनाया राहुल संस्कृत आएं उनको अंगन हीरा कहा तो जगदीश चंद्र माथुर ने उन्हें भारत मुनी की परंपरा का कलाकार कहा उनके निर्देशन में भोजपुरी के नाटक बेटी बचाओ गबर श्री चोर बेटी वियोग आज भी भोजपुरी अंचल में मंचन होता रहता है इन नाटकों और फिल्मों के माध्यम से ठाकुर में सामाजिक सुधार की दिशा में जबरदस्त योगदान दिया था भिखारी ठाकुर कई कामों में व्यस्त रहने के बावजूद भी भोजपुरी साहित्य की रचना में लगे रहे उन्होंने तकरीबन 29 पुस्तके लिखी जिस वजह से वह आगे चलकर भोजपुरी साहित्य संस्कृति के संवाहक बने हंसी हंसी पनवा खिओले बईमनवा कि अपना बसेला

परदेश,गोरी रे चुनरिया में दगिया लगाई गई रे मारी रे करेजवा में ठेस, फिल्म विदेशिया ने भिखारी ठाकुर को खासा पहचान उस फिल्म की यह दो पंक्तियां आज भी भोजपुरी अंचल में मुहावरे की तरह गूंजती रहती है बिहार में उस खाटी नाच शैली की मौत हो चुकी है जिसके लिए भिखारी ठाकुर को याद किया जाता है सभ्य नाच या विदेशिया शैली के आविष्कारक भिखारी ठाकुर ही थे स्त्री भेष में लड़कों या पुरुषों को नचाने की परंपरा वह अब भी स्वतंत्र रूप से खत्म हो चुका है अंग्रेजी राज के खिलाफ नाटक मंडली के माध्यम से उन्होंने जन जागरण भी किया हालांकि बाद में अंग्रेजों ने उनके काम के लिए उन्हें राय बहादुर की उपाधि तक दी 83 साल की उम्र में 10 जुलाई 1971 को भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की मौत हो गई ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here