गया में 19 हजार से ऊपर पॉजिटिव केस और 89 मौतों के बाद कोरोना मरीजों के लिए बढ़े 50 और बेड

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कोरोना की दूसरी लहर में गया में जिस तेजी से संक्रमण बढ़ रहा है, उस हिसाब से वहां संसाधन ही नहीं है। 100 बेड वाले मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल ( MMC) गया में बेड फुल हैं। गया में 19 हजार से ऊपर पॉजिटिव केस और 89 मौतों के बाद कोरोना मरीजों के लिए 50 और बेड बढ़ाने की कवायद शुरू हुई है। गया में मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल और दो निजी अस्पतालों के अलावा अब तीन और प्राइवेट अस्पताल कोरोना मरीजों के इलाज के काम से जुड़ गए हैं। इनके जुड़ने से करीब 40 बेड और कोरोना मरीजों के लिए सुरक्षित हो गए। इन अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए पर्याप्त व्यवस्था होने का दावा जिला अस्पताल प्रबंधन की ओर से किया जा रहा है।

मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल नहीं सह पा रहा लोड
मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब निजी हॉस्पिटलों को जिला प्रशासन तेजी से अपने पैनल में जोड़ रहा है। मगध मेडिकल कॉलेज के पास 100 बेड का कोरोना वार्ड है। साथ ही में 14 बेड का ICU है। इसके अलावा इमरजेंसी वार्ड को भी कोरोना संदिग्ध के इलाज के लिए उपयोग किया जा रहा है। लेकिन, यह सारी सुविधाएं कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के आगे नाकाफी साबित हो रही हैं।

अब 50 बेड कोरोना मरीजों के इलाज के लिए निजी में
मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन व जिला प्रशासन ने पूर्व में गया डोभी मार्ग स्थित AIMS हॉस्पिटल को अपने पैनल में शाामिल किया था। इसके बाद उसने नवनीत निश्चल हॉस्पिटल को शामिल किया। इन दोनों अस्पतालों में कोरोना मरीजों के नि:शुल्क इलाज के लिए 10 बेड की सुविधा है। यह संख्या भी जब कम पड़ने लगी तो अब जिला प्रशासन ने 3 और निजी अस्पतालों को अपने पैनल में जोड़ा है। उन तीन में से एक वैष्णवी हॉस्पिटल गंगा महल, दूसरा श्रीराम हॉस्पिटल दुखहरणी मंदिर और तीसरा चंदौती थाना क्षेत्र स्थित बुद्धा नर्सिंग होम है। इन तीनों के मिलाकर अब 50 बेड कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास हो गए।

200 बेड का एक और वार्ड तैयार करने की तैयारी
मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया में 200 बेड का एक और वार्ड तैयार करने की तैयार चल रही है। इसमें अभी कुछ दिनों का समय बाकी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि करीब पांच दिन में वह काम भी पूरा हो जाएगा। जिला अस्पताल प्रबंधक निलेश कुमार ने बताया कि निजी हॉस्पिटल के आगे आने से मगध मेडिकल कॉलेज पर कुछ दबाव कम पड़ेगा। खास बात यह है कि पैनल में शामिल सभी अस्पताल शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में है, जहां नजदीकी मरीजों को सुविधा होगी

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