तीसरी बारात में मिला भरपेट भोजन

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— वीरेंद्र यादव ——————
पिछले एक साल में पटना के वेटरनी कॉलेज मैदान में तीन राजनीतिक शादियों में शामिल होने का मौका मिला। तीनों तीन पार्टियों व तीन जातियों की थी। एक शादी में बारातियों के लिए खाने की व्यवस्था नहीं थी, यह पहले ही बारातियों को बता दिया गया था। दूसरी शादी में थाली के लिए मारामारी करनी पड़ी और तीसरी शादी में बारातियों ने छक कर खाया। इन तीनों बारातियों में दो मीडिया के लिए ‘विवाह रैली’ के समान थी, जबकि तीसरी शादी हमारे लिए सामाजिक आयोजन था। तीनों बारातियों की खासियत रही कि तीनों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ हम भी आमंत्रित थे। तीनों में दोनों लोग शामिल भी हुए। दो बारातियों में मुख्यमंत्री ही मुख्य अतिथि थे, जबकि तीसरी शादी में मुख्यमंत्री कब आये और कब चले गये, यह बमुश्किल पता चल सका।
पहली शादी थी उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के बेटे उत्कर्ष की, दूसरी शादी थी लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप की और तीसरी शादी थी नवीनगर के विधायक वीरेंद्र कुमार सिंह के पुत्र विवेक की। उत्कर्ष की शादी पिछले साल दिसंबर महीने में हुई थी। तेज प्रताप की शादी पिछले मई महीने में हुई थी और विवेक की शादी सोमवार को यानी 10 दिसंबर को हुई। तीनों बारात में बेहतर इवेंट मैनेजमेंट भी था। उत्कर्ष की शादी में देशभर के भाजपाई नेता पहुंचे थे तो तेजप्रताप की शादी में राज्य भर से राजद के कार्यकर्ता आये थे। जबकि विवेक की शादी में लगभग सभी बाराती औरंगाबाद से आये थे। क्योंकि दोनों पक्ष औरंगाबाद के निवासी ही थे। हम भी औरंगाबाद के होने के कारण ही आमंत्रित थे। ओबरा व नबीनगर दोनों आपस में लगा हुआ विधान सभा क्षेत्र है।
सुशील मोदी के पुत्र की शादी दिन में हुई थी और शादी का विधि-विधान पूरा करने के लिए ब्राह्मणों की जमात महाराष्ट्र से आयी थी। मंच से यह भी बताया जा रहा था कि ब्राह्मण महाराष्ट्र से आये हैं। बारात में आम लोग कम और खास लोग ही ज्यादा थे। वजह भी साफ थी। सुशील मोदी ने आमंत्रण कार्ड मेल से भेजा था। स्वाभाविक है कि श्री मोदी के मेल-लिस्ट में आम आदमी की जगह नहीं होगी। इसके विपरीत लालू यादव के पुत्र के विवाह में बाराती अनियंत्रित थे। लालू समर्थकों के लिए सूचना ही काफी होती है। कार्ड की अनिवार्यता उनके लिए निरर्थक है। यही कारण रहा कि बारातियों के लिए भोजन पर आफत आ गयी। दूल्हा और दुल्‍हन को मंच तक पहुंचाने वाली टीम हरियाणा से आयी हुई थी। इसमें लड़की और लड़के दोनों शामिल थे। दुल्हन की पालकी उठाने से लेकर नाचने वाली पूरी टीम हरियाणा की ही थी। पालकी की सुरक्षा भी उनके जिम्मे ही थी। दोनों बारातियों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तियों की भरमार थी।
वीरेंद्र सिंह के पुत्र की शादी थोड़ी अलग थी, हालांकि इवेंट मैनेजमेंट उनसे अलग नहीं था। दुल्हा-दुल्हन के आगे-आगे नाचने हुए चलने वाली टीम में लड़कियां शामिल थीं। यह टीम कोलकाता से आयी थी। ये लोग आपस में बांग्ला में बातचीत कर रहे थे। मंचीय मनोरंजन का जिम्मा भी यही उठा रहे थे। बारातियों में मुख्यमंत्री के अलावा किसी को वीआईपी नहीं कहा जा सकता है। राज्य सरकार के कुछ मंत्री और विधायकों को छोड़कर सभी बाराती औरंगाबाद और रोहतास के ही थे। औरंगाबाद के सांसद और विधायक भी बारात में शामिल हुए। मुख्यमंत्री के जाने के बाद बाराती भोजन के लिए आमंत्रित किये गये। मांसाहार काउंटर पर भीड़ थी। लंबी लाइन भी लग गयी। लेकिन शाकाहार काउंटर पर कम ही लोग थे। हमने मडुआ की रोटी के साथ खाने की शुरुआत की। रोटी बना रही महिलाओं से हमने पूछा- आप लोग कहां से आये हैं। उनका जवाब था- कोलकाता।
वीरेंद्र सिंह के बेटे के शादी कार्ड पर लिखा हुआ था- दहेज रहित शादी। कार्ड देखकर आशंका हुई कि ‘भोजन रहित’ बारात तो नहीं है। दो बारात में बिना खाये लौटे बाराती के लिए तीसरी बारात में भोजन को लेकर आशंका स्वाभाविक थी। खैर, बारात में औरंगाबाद के लोगों से मुलाकात के साथ ही भर पेट भोजन भी हुआ। बनिया की शादी में बिना खाये लौटे और यादव की शादी में धक्का-धुक्की से थाली लुटने के बाद राजपूत की बारात में शांति से खाने को मिला।
वेटनरी कॉलेज से निकले तो एक आदमी ने हाथ दिया और गाड़ी पर बैठ गये। रास्ते में बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका नाम योगेश कुशवाहा हैं। पत्रिकाओं में लिखते भी हैं। उन्हें स्टेशन जाना था, सो हमने चितकोहरा पुल पार कर उतार दिया। इसके बाद हमने उन्हें अपनी पत्रिका ‘वीरेंद्र यादव न्यूज’ की कॉपी दी। देखते ही वे चौंके- आप ही वीरेंद्र यादव हैं। आप एकदम गड़बड़ आदमी हैं। इतना अच्छा लिखते हैं। आपकी पत्रिका में काफी आंकड़ा रहता है। इसको तो हम संभाल कर रखते हैं। लिखिये हमारा मोबाइल नंबर। आप एकदम गड़बड़ आदमी हैं। जितना मैटर आप देते हैं, उतना गूगल के पास भी नहीं होता है। हमें लगा कि बारात आने की असली सार्थकता यही थी, जो उनके मन में पत्रिका को लेकर धारणा बनी थी। हमने उन्हें धन्यवाद कहा और फुलवारी के लिए बढ़ लिये।

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