पटना में लैब टेक्नीशियन निशी पांडे ने 50,000 से ऊपर टेस्ट किया,PPE पहने शरीर थकता है,मन नहीं

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निशी पांडे प्रतिदिन 10 से 12 घंटे PPE किट पहन लोगों का RTPCR और एंटीजन टेस्ट करने लगी। - Dainik Bhaskar

निशी पांडे प्रतिदिन 10 से 12 घंटे PPE किट पहन लोगों का RTPCR और एंटीजन टेस्ट करने लगी।

लगातार 11 महीने यानी 335 दिन तक बिना कोई छुट्टी लिए, यहां तक कि साप्ताहिक अवकाश भी नहीं लिया। लगातार काम करती रही हैं निशी। पटना की निशी पांडे लैब टेक्नीशियन हैं। बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने इनकी प्रतिभा को देखते हुए कोरोना महामारी की जांच में लगा दिया। निशी पांडे भी जांच में ऐसी लगीं कि उन्हें यह काम लोगों की सेवा लगने लगी। प्रतिदिन 10 से 12 घंटे PPE किट पहन लोगों का RTPCR और एंटीजन टेस्ट करने लगी। पिछले साल से शुरू हुआ यह सिलसिला अभी तक खत्म नहीं हुआ है।

कोरोना महामारी में डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी ने इन्हें डेप्यूटेशन पर पटना ट्रांसफर कर दिया।

कोरोना महामारी में डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी ने इन्हें डेप्यूटेशन पर पटना ट्रांसफर कर दिया।

अब तक 50,000 से ऊपर लोगों का किया टेस्ट

निशी पांडे ने 2010 में पटना के पंडारक PSC में ज्वाइन किया था। लेकिन जैसे ही कोरोना महामारी शुरू हुई, इनको डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सोसायटी की तरफ से डेप्यूटेशन पर पटना ट्रांसफर कर दिया। पटना के गार्डिनर रोड अस्पताल में लोगों के कोरोना संक्रमण की जांच करती हैं। प्रतिदिन लगभग 200 लोगों का स्वैब लेकर लैब में भेजती हैं। निशी की मानें तो अब तक इन्होंने 50,000 से ऊपर लोगों का टेस्ट किया है।

निशी के छोटे-छोटे दो बच्चे हैं, जिन्हें मां-भाई-बहन मिलकर संभालते हैं।

निशी के छोटे-छोटे दो बच्चे हैं, जिन्हें मां-भाई-बहन मिलकर संभालते हैं।

11 महीने की तपस्या में परिवार वालों ने दिया साथ

इस 11 महीने की तपस्या में निशी के परिवार वालों ने खूब साथ दिया। निशी के पति राजेश कुमार आयकर विभाग हैदराबाद में हैं। निशी के छोटे-छोटे दो बच्चे हैं, जिन्हें खुद ही संभालना होता है। हालांकि निशी के मां-भाई-बहन मिलकर पूरे दिन बच्चों को संभालते हैं।

निशी बताती हैं कि पूरे दिन PPE किट पहन काम करने में परेशानी तो होती ही है, साथ ही पूरा शरीर थक जाता है, लेकिन मन से वह कभी नहीं हारीं। उन्होंने बताया कि पूरे एक साल में वह कभी बीमार भी नहीं पड़ीं। यहां तक कि संक्रमित मरीजों की जांच उन्होंने की, लेकिन वह कभी संक्रमित नहीं हुईं।

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