परिहार के जिला परिषद् ने थानेदार पर 2000 गाय को कटवाने का लगाया आरोप

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सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने एक ऐसा मामला सामने आया, जिसे जानकार सीएम भी चौंक गए. दरअसल ‘जनता के दरबार में मुख्यमंत्री’ कार्यक्रम में पहुंचे सीतामढ़ी जिला परिषद के सदस्य ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि बेला के थानेदार ने पशु तस्करों के साथ मिलकर लगभग 2000 गायों को मरवा दिया.

जनता दरबार में पहुंचे सीतामढ़ी जिला परिषद के सदस्य ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा कि “सीतामढ़ी जिला अंतगर्त बेला थाना के थानेदार ने 2000 गायों को तस्करों के हाथों बेच दिया. जिन्होंने इन गायों की हत्या कर दी. मैंने पिछले तीन साल में बिहार के कई अधिकारी और पदाधिकारी से शिकायत की. लेकिन आजतक मुझे इंसाफ नहीं मिला. नेपाल से जो मवेशी तस्करी के लिए लाये जाते हैं, उन्हें एसएसबी वाले पकड़कर बेला थाना को दे देते हैं और फिर थानाध्यक्ष उन गायों को तस्करों के साथ में बेच देते हैं. जबकि एसएसपी को पकड़ी गई गायों या अन्य मवेशियों को सीतामढ़ी गौशाला में देना चाहिए. थानाध्यक्ष ने सात आदमी के साथ मिलकर दो हजार गायों को बेचा है. लेकिन शिकायत करने पर उल्टे मुझे जिला प्रशासन द्वारा ही फंसाते हैं.”

शख्स ने मुख्यमंत्री से आगे कहा कि “घटना परसों की है. जनता दरबार में आने की खबर मिलते ही डीएसपी ने मुझे बुलाया और धमकाया कि सीएम के जनता दरबार में तुमको नहीं जाना है. तुम्हारा चुनाव होने वाला है. अगर तुम जाओगे, तो तुमको डिस्टर्ब करेंगे. जब मैंने बात नहीं मानी तो डीएसपी ने 2 अक्टूबर के डेट में तीन लोगों पर एफआईआर कर दिया.”

सीतामढ़ी जिला परिषद के सदस्य की शिकायत सुनकर खुद मुख्यमंत्री के भी होश उड़ गए. उन्होंने दौरान बिहार के डीजीपी एसके सिंघल को फोन घुमाया और तत्काल इस मामले को देखने का आदेश दिया. सीएम ने पुलिस महानिदेशक के पास युवक को भेजते हुए कहा कि तुरंत इस मामले को देखिये.

गौरतलब हो कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के संबंध के साथ ट्रांजिट रूट से पारस्परिक व्यापार का संबंध भी है. दोनों देश के खुली सीमा पर तय रूट से व्यापार सहित लोगों की आवाजाही एक देश से दूसरे देश में होती है. निर्धारित रूट के अलावा दोनों देश के बीच भारत के सीमावर्ती क्षेत्र स्थित किशनगंज, सीतामढ़ी और अररिया जिला से सटे नेपाल की खुली सीमा क्षेत्र में तस्करी का कारोबार चरम पर है.

बिहार में खुली सीमा का लाभ लेकर तस्कर कई बार मवेशी चराने और किसान होने का बहाना कर मवेशी को नेपाल पहुंचा देते हैं. ऐसे तस्कर सरकार को बिना टैक्स दिए एक देश से दूसरे देश में खुली सीमा का फायदा उठाकर सामान तस्करी करते हैं. तस्करी का यह खेल सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों का अवैध तरीके से एक व्यापार बन गया है. अधिकांश लोग खुली सीमा आने वाले तस्करी के सामान का स्थानीय स्तर पर व्यापार करते हैं, जो सरकार को बिना कर चुकाए राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं. मवेशी तस्करी रोकने के लिए एसएसबी की ओर से डे-नाइट पेट्रोलिंग होती है. तस्करों और मवेशियों को पकड़ा भी जाता है. लेकिन उसके बाद पुलिसवाले जो खेल करते हैं, उसका आज पर्दाफाश हुआ है.

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