प्रवासी मजदूरों के लौटने से गया के गांवों में दहशत,आनेवालों की स्वास्थ्य जांच भी नहीं हो रही

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कोरोना महामारी के बीच इन दिनों प्रवासी मजदूरों का आना भी बदस्तूर जारी है। प्रवासी मजदूरों का जत्था जिले के किसी न किसी ब्लाक में कहीं न कहीं हर दूसरे दिन आ रहा है। मजदूर बसों में भर-भर कर अपने गांव को लौट रहे हैं। इनकी आमद से गांव के लोगों को भी संक्रमण का भय सालने लगा है। लोगों को डर सता रहा है कि कहीं संक्रमण गांव में भी न फैल जाए।

पांच दिनों में तीन बसों से भरे मजदूर आए

जिले के मोहड़ा प्रखंड के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे प्रदेश में रोजगार की तलाश में ठंड के दिनों में जाते हैं। वहां कुछेक महीने तक काम करने के बाद वह मॉनसून के आने के पूर्व वापस लौट आते हैं। वापस लौटने वाले मजदूरों की संख्या इन दिनों बढ़ गयी है।

मोहड़ा प्रखंड में बीते पांच दिनों में तीन बसों से मजदूर यूपी से यहां आए हैं। सोमवार को भी मजदूरों व उनके परिजनों से भरी हुई बस आई है। इस बस में करीब 40 मजदूर थे, जो पूर्वी यूपी के विभिन्न जिलों में काम कर रहे थे। बीते एक सप्ताह में करीब 150 मजदूर वापस अपने घर को लौटे हैं।

यूपी में कोरोना की वजह से काम-धंधा चौपट

इन मजदूरों से पूछा गया कि वापस क्यों लौट आए, तो बताया कि कोरोना यूपी में भी तेजी फैला है। इस वजह से वहां काम-धंधा ठप पड़ गया है। ऐसे में घर के सिवाए दूसरा कोई ठिकाना नहीं है। यही वजह है कि घर वापस लौटना पड़ा। कोरोना का टीका लिया या नहीं, इस सवाल पर मजदूर चुप्पी साध गए। कैमरा के समक्ष आ कर बोलने से परहेज करने लगे।

स्वास्थ्य विभाग भी चुप, ग्रामीण चिंता में

खास बात यह है कि इन प्रवासी मजदूरों की वापसी की खबर से न केवल गांव के लोग बल्कि स्वास्थ्य विभाग भी वाकिफ है। बावजूद इसके प्रवासी मजदूरों की कहीं कोई जांच नहीं की गई। जांच नहीं किए जाने की वजह से गांव के लोग भयभीत हैं। उनका कहना है कि प्रवासी मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच होनी चाहिए थी।

ग्रामीण निर्मल सिंह की चिंता है कि मजदूरों की स्वास्थ्य जांच नहीं हुई तो कई गांव प्रभावित होंगे।

ग्रामीण निर्मल सिंह की चिंता है कि मजदूरों की स्वास्थ्य जांच नहीं हुई तो कई गांव प्रभावित होंगे।

मोहड़ा के निर्मल सिंह और श्रीराम सिंह कहते हैं कि कौन मजदूर कहां से आ रहा है और वह संक्रमित है या नहीं, यह कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में जांच जरूरी है। एक मजदूर संक्रमित निकला तो गांव व उसके आसपास के गांव के लोग भी संक्रमित हो जाएंगे। क्योंकि जो प्रवासी मजदूर आ रहे हैं, वह किसी एक गांव के नहीं हैं। हर एक का गांव अलग है। उनकी जांच नहीं की गई तो गांव की स्थिति गंभीर हो सकती है। श्रीराम सिंह का कहना है कि कोरोना के बीच सर्दी-बुखार को लोग आम बात मानने लगे हैं। जबकि यह दोनों बीमारी कोरोना संक्रमण की ओर ले जाती है।

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