बाढ़ में डूबा गांव और नाव पर जिंदगी चलाती महिलाएं

0
280
Share

मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड का सिमरा गांव बाढ़ से तबाह हो चुका है। बूढ़ी गंडक ने रौद्र रूप धारण कर लिया है, जिसके कारण गांव में चारों ओर पानी ही पानी है। ऐसे में लोगों को जरूरत का सामान लाने के लिए गांव से करीब 4.5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। इसके लिए एकमात्र सहारा नाव है। समस्या यह भी है कि गांव में केवल महिलाएं ही हैं। गांव के अधिकांश पुरुष बाहर रहकर कमाते हैं। ऐसे में जब सिमरा गांव की दो महिला संजीदा और सुजिया देवी बाढ़ में फंसीं तो उन्होंने कर्जा लेकर एक नाव ही खरीद लिया।

उन्होंने बताया कि राशन-पानी पर जब लाले पड़ने लगे तो उन्होंने 22 हजार रुपए कर्जा लेकर एक नाव खरीदी। इससे वह अपने घर के लिए राशन-पानी भी लाती हैं और गांव के अन्य लोगों को भी नाव से पहुंचाती हैं। पूरे इलाके में दोनों की खूब चर्चा हो रही है।

दरअसल, मुजफ्फरपुर जिले के कई प्रखंडों में कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। लोग पिछले कई दिनों से ऊंचे स्थान पर शरण ले रहे हैं। वहीं, कई इलाकों में संपर्क टूट जाने से नाव के सहारे लोग आने-जाने को मजबूर हैं।

बाढ़ के बीच इस समय गांव में पुरुष नहीं हैं। सभी बाहर रहकर कमाते हैं, जिसके कारण बच्चों की परवरिश पूरी तरह से महिलाओं पर ही है। सुजिया देवी ने बताया कि अभी गांव में कोई पुरुष सदस्य नहीं है। इसलिए नाव के सहारे से जरूरत की चीजों को लेकर आना-जाना पड़ता है। सरकारी नाव भी गांव में नहीं है। इसकी वजह से उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। इसमें डर भी लगता है, लेकिन मजबूरी में ऐसा करना पड़ रहा है।

97 पंचायतें बाढ़ से बेहाल

जिले के 10 प्रखंडों की 97 पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। तीन लाख से अधिक की आबादी इससे प्रभावित है। राहत की बात यह है कि खतरे के निशान से ऊपर बह रही बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट हो रही है। इसके एक से दो दिनों में खतरे के निशान से नीचे आने की संभावना जताई गई है। इससे शहर पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा टल गया है। बागमती एवं गंडक पहले से खतरे के निशान से नीचे बह रही है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 11 पंचायतें पूर्ण एवं 88 आंशिक रूप से बाढ़ की चपेट में हैं। लोगों के भोजन को लेकर 97 स्थानों पर सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं। कुछ इलाके से पानी निकलने के कारण सामुदायिक रसोईघरों की संख्या कम की गई है। बाढ़ पीडि़तों की जरूरत एवं उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 56 सरकारी एवं 198 निजी नावें चलाई जा रही हैं। नौ मेडिकल कैंप भी चलाए जा रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here