शहाबुद्दीन के वकील का दावा- तिहाड़ प्रशासन ने उन्हें कोविड पॉजिटिव कैदी के साथ रखा, बीमार हुए तो कम सुविधाओं वाले DDU भेजा

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बिहार के बाहुबली नेता व पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के निधन के बाद लापरवाही की एक बड़ी बात सामने आई है। आरोप दिल्ली के तिहाड़ जेल प्रशासन और इलाज करने वाली मेडिकल टीम पर लगा है। जेल के जिस सेल में शहाबुद्दीन को रखा गया था, उसमें मो. सैय्यद अली नवाज नाम का कोरोना पॉजिटिव कैदी था। यह जानने के बाद भी जेल प्रशासन ने दोनों को अलग नहीं किया। पूरे सात दिनों तक दोनों को एक ही सेल में रखा। शहाबुद्दीन के एडवोकेट रंधीर कुमार की तरफ से दावा यह किया गया है कि उन्हें साथ रहने वाले कैदी से ही कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ।

छोटा राजन को AIIMS भेजा गया, शहाबुद्दीन को DDU क्यों?

एडवोकेट रंधीर कुमार ने तिहाड़ जेल प्रशासन पर शहाबुद्दीन का इलाज कराने में भी भेदभाव बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। उनकी मानें तो तिहाड़ जेल में बंद अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन भी कोरोना का शिकार हुआ था। बीमार पड़ने पर उसे इलाज के लिए AIIMS भेजा गया। जबकि, मो. शहाबुद्दीन को दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल (DDU) में एडमिट कराया गया, जहां इलाज के उचित इंतजाम नहीं थे। वहां सिटी स्कैन करने वाली मशीन भी नहीं है। डॉक्टर ऐसे मेडिसीन लिख रहे थे, जो बाजार में मिल नहीं रहे थे। उनके हालात के बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं दी जा रही थी।

शहाबुद्दीन के कहने पर हाइकोर्ट में दायर हुई थी रीट

हॉस्पिटल में इलाज के दौरान ही मो. शहाबुद्दीन ने दिल्ली हाइकोर्ट के एडवोकेट रंधीर कुमार से कांटैक्ट किया था। पूरे मामले की जानकारी दी थी। उन्हें बताया था कि साथ रहने वाला कैदी 17 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव हुआ था। फिर भी दोनों में से किसी को अलग नहीं किया गया। जब वो बीमार पड़े, तब हॉस्पिटल भेजने में देर किया गया। फैमिली से भी बात नहीं करने दिया जाता था। आखिर में उन्हें 23 अप्रैल को हॉस्पिटल में एडमिट करा दिया।

इसके बाद ही 24 अप्रैल को दिल्ली हाइकोर्ट में एक रीट दाखिल की गई थी। इस पर 28 अप्रैल को ऑर्डर आया। हाइकोर्ट ने कहा कि दो जूनियर डॉक्टर और एक सीनियर डॉक्टर इलाज करेंगे। शहाबुद्दीन की ताजा हालत के बारे में उनके परिवार को दिन में दो बार अपडेट किया जाए। बात करने के लिए एक मोबाइल और चार्जर उपलब्ध कराएं। हाइकोर्ट ने खुद से इसे मॉनिटर करने की बात कही थी।

परिजन अब सुप्रीम कोर्ट में अपील कर जांच की मांग करेंगे

एडवोकेट के अनुसार उन्होंने अपने रीट में अंदेशा जताया था कि मो. शहाबुद्दीन के साथ राजनीतिक साजिश की जा सकती है। अब मौत के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उनके साथ भेदभाव किया गया है। हमारे पास इस मामले में कुछ सबूत भी हैं जिसके आधार पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग करेंगे। साथ ही इलाज करने वाली मेडिकल टीम को भी इस दायरे में लाने की अपील की जाएगी। मो. शहाबुद्दीन के इलाज के दौरान उन्हें किन लोगों के कॉल आ रहे थे? कौन लोग उन्हें डायरेक्शन दे रहे थे? इन सवालों का जवाब उन्हें देना होगा।

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