सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण कानून पर मतभेद,गृह राज्यमंत्री बोले- जनसंख्या कानून अभी देश के लिए ज्यादा जरूरी

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जनसंख्या नियंत्रण कानून पर सियासत गरम है। बिहार की दो सत्ताधारी पार्टियां JDU-BJP अलग-अलग रुख अपना रही है। मंगलवार को पटना पहुंचे देश के गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून की देश को अभी सख्त जरूरत है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने इस क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है। उनको धन्यवाद। उन्हें सफलता भी मिलेगी।

कहा- ‘अभी देश में जनसंख्या विषय पर अवलोकन की ही जरूरत है। उस पर जो भी विचार होंगे, उस पर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए’। हालांकि नित्यानंद राय ने सिविल कोड पर कुछ नहीं कहा।

वहीं, सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था- ‘जनसंख्या नियंत्रण के लिये अगर सिर्फ आप कानून बनाकर उसका उपाय करेंगे तो यह संभव नहीं है। आप चीन का उदाहरण देख लीजिये। वहां एक से दो बच्चों को लेकर निर्णय लिया गया। अब देखिए वहां क्या हो रहा है। सबसे बड़ी चीज है कि महिलाएं जब पूरी तौर पर शिक्षित होंगी तो अपने आप प्रजनन दर घट जायेगा। इसमें किसी भी कम्यूनिटी को लेकर बातचीत न हो। हम कानून के पक्ष में नहीं हैं। अलग-अलग राज्य के लोगों की अपनी सोच है, वे अपने ढंग से जो चाहे करें’।​​​​​​

RJD नेता ने CM पर ही लगाया आरोप

RJD के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि CM नीतीश कुमार गुड़ खाएं और गुलगुला से परहेज करते हैं। ये अटल बिहारी वाजपेयी की BJP नहीं है। अभी की BJP के साथ सहयोगी दलों का कोई कॉमन मिनिमम प्रोग्राम तय नहीं है। नीतीश कुमार यदि किसी मुद्दे पर बोलते हैं तो BJP के तरफ से 10 नेता विरोध में खड़े हो जाते हैं। नीतीश कुमार यूनिफार्म सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण पर गोल-गोल बातें करते हैं। ये सब दिखाने की बातें है।

NDA में सब कुछ ठीक नहीं

RJD नेता ने कहा कि BJP ने धारा 370 और 35A जम्मू-काश्मीर से खत्म कर दिया। उसका विरोध करते थे और जब सदन में जरूरत पड़ी तो वाक आउट करके निकल गए और सदन में संख्या के आधार पर दोनों कानून को खत्म कर दिया गया। शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार की ये पुरानी आदत रही है, पहले तो ये विरोध करते हैं और बाद पलट जाते हैं। इससे साफ हो गया है कि NDA में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। NDA के नेता आपस में ही एक दूसरे से उलझ रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने ट्वीट कर की थी तारीफ

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय से निकलकर अब केंद्र सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री बने गिरिराज सिंह ने बिहार आते ही जनसंख्या नीति से जुडे़ मुद्दे को छेड़ दिया है। अपने बयान के साथ ट्वीट में भी गिरीराज सिंह ने यूपी के जनसंख्या नीति की तारीफ की। बिहार के बेगूसराय में बैठे केन्द्रीय मंत्री का यूपी की जनसंख्या नीति पर बोलना, बिहार सरकार पर जनसंख्या नीति बनाने के लिए दबाब की रणनीति मानी जा रही है ।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिकता संहिता एक सेकुलर और पंथनिरपेक्ष कानून है, जो किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है। भारत में अभी इस तरह की कानून की व्यवस्था नहीं है। फिलहाल देश में हर धर्म के लोग शादी, तलाक और जमीन जायदाद के मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ के मुताबिक करते हैं। मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय के अपने पर्सनल लॉ हैं। जबकि, हिंदू पर्सनल लॉ के तहत हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के सिविल मामलों का निपटारा होता है।

BJP अब इस समान नागरिकता संहिता को लागू कराना चाहती है। वहीं जनसंख्या नियंत्रण कानून उत्तर प्रदेश में लाने की तैयारी चल रही है। देश स्तर पर भी इसे लाने की तैयारी चल रही है। क्योंकि BJP का का मानना है कि एक खास समुदाय द्वारा जनसंख्या को बढाने की साजिश चल रही है।

योगी सरकार की जनसंख्या नीति

यूपी की योगी सरकार ने जनसंख्या नीति का ऐलान कर दिया है। जनसंख्या नियंत्रण कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस ड्राफ्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चों के अभिभावकों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। ऐसे लोग स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। राशन कार्ड में भी 4 से अधिक सदस्यों के नाम नहीं लिखे जाएंगे।

जनसंख्या नियंत्रण से संबंधित पाठ्यक्रम स्कूलों में पढ़ाए जाने का सुझाव भी दिया है। कानून लागू होने के बाद यदि किसी महिला को दूसरी प्रेग्नेंसी में जुड़वा बच्चे होते हैं, तो वह कानून के दायरे में नहीं आएगा। तीसरे बच्चे को गोद लेने पर भी रोक नहीं रहेगी। यदि किसी के 2 बच्चे नि:शक्त हैं, तो उसे तीसरी संतान होने पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा कि वे इस कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे।

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