4 हाथियों के झुंड ने दुकानें तोड़ीं, फसल बर्बाद की, नियंत्रित करने में लगे वन विभाग के ट्रेंकुलाइजर गन भी नहीं आए काम

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नेपाल से आए 4 हाथियों के झुंड ने इलाके में काफी तबाही मचाई है। जिधर-जिधर गए जमकर तोड़फोड़ की। खेतों में घुसे तो फसलों और केले के बागान को नुकसान किया, आबादी वाले इलाके में आए तो दुकानों और गुमटियों को तोड़ दिया। शुक्रवार रात से ही नेपाल के जंगल से आए हाथियों के झुंड ने बसन्तपुर में तबाही मचा रखी है।

वन विभाग बोला-हाथियों को भेजा जा चुका नेपाल

हाथियों के झुंड में से एक हाथी शहर की ओर निकल पड़ा और बसन्तपुर वार्ड 08 समेत नगर पंचायत के वार्ड 09 और प्रोफेसर कॉलोनी वार्ड 13 में छोटी-मोटी दुकानों और गुमटियों को तोड़ दिया। वन विभाग के फोरेस्टर KK झा ने बताया कि अब तक क्षति का आंकलन नहीं किया गया है, लेकिन हाथियों को नेपाल भेजा जा चुका है।

खोखला साबित हुआ वन विभाग का दावा

पिछले दिनों वन विभाग ने नेपाल से आने वाले हाथियों को रोकने के लिए चिह्नित स्थलों पर सायरन लगाया था और दावा किया गया था कि अब नेपाल के जंगल से हाथी को इस सायरन से रोका जा सकेगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

12 साल से रतजगा करते आ रहे गांव के किसान

12 वर्षों से नेपाल से आकर हाथियों के झुंड भारतीय प्रभाग में तबाही मचाते हैं। हर साल जान-माल का नुकसान होता है। वन विभाग, जिला प्रशासन और नेपाल प्रशासन की संयुक्त बैठकों में दर्जनों निर्णय लिए गए, आश्वासन दिए गए, हाथियों को सीमा पार नहीं आने की कुछ योजनाओं पर कार्य भी किए गए, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों और किसानों की समस्याएं जस की तस बनी रही। आज भी किसान हाथियों के आने के डर से रतजगा करते रहते हैं।

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