बिहार की सियासत में एंट्री पर शाहनवाज बोले- मुझे लाया नहीं गया, मैं खुद चलकर आया हूं, क्यों आना पड़ा, इस पर ‘बेबाकी’ से चुप्पी साध गये

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बिहार के डिप्टी सीएम की कुर्सी छोड़ राज्यसभा गए सुशील कुमार मोदी की विधान परिषद वाली सीट भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन को दी गई, इसका मतलब भाजपा के पुराने दिग्गज साफ समझ रहे हैं, लेकिन शाहनवाज नामांकन के बाद भी अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। सीमांचल, पश्चिम बंगाल के साथ बिहार में भाजपा के अल्पसंख्यक चेहरे की राजनीति पर भी बोलने से कतराते रहे। बेबाकी से अपनी बात रखने वाले शाहनवाज की चुप्पी के निहितार्थ जानने के लिए भास्कर ने उनसे खास बातचीत की।

https://youtu.be/Zz-kErKQDV4
भास्कर : क्या शाहनवाज हुसैन का वनवास खत्म हो गया, बिहार की राजनीति में सक्रिय होंगे अब?

शाहनवाज : 2014 चुनाव में 1 प्रतिशत से भी कम वोटों से हारा था और हमलोगों ने 2019 में यह सीट जदयू को दी तो मैं नहीं लड़ा था। 13 वीं, 14 वीं, 15 वीं लोकसभा में मैं जीता। किशनगंज से जीता, भागलपुर से जीता, लेकिन पार्टी का काम कर रहा था। पार्टी ने कभी भी मुझे वनवास में नहीं रखा। पार्टी ने मुझे राष्ट्रीय प्रवक्ता, केन्द्रीय चुनाव समिति का सदस्य और अभी कश्मीर का इंचार्ज बनाया था। कश्मीर में जाकर भी कमल खिलाया था। बिहार के चुनाव में भी था। बीच में कोविड पॉजिटिव होने की वजह से दिक्कत आई थी, लेकिन अभी आदेश हुआ। भाजपा कार्यकर्ता के लिए काम-काम होता है। हमें जो काम मिलता है, ईमानदारी से करते हैं। सुशील मोदी जी के बचे हुए कार्यकाल के लिए मुझे नामित किया गया, उच्च सदन में ईमानदारी से काम करूंगा।

भास्कर : राजनीति में वक्त बदलता है, आपका भी बदला है। कभी जिन चेहरों की वजह से आपको बिहार की राजनीति से बाहर जाना पड़ा था, आज वही आपके बगल में बैठ आपका नामांकन करवा रहे थे?

शाहनवाज : तब भी वो हमारे नेता ही थे, आज भी हमारे नेता हैं। कितना स्नेह दिया सबों ने, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आये, सुशील मोदी जी आयें, हमारे दोनों डिप्टी सीएम आये। ऐसा नामांकन तो मैंने कभी किया ही नहीं था। सब आये और सबने बड़ों के नाते मुझे आशीर्वाद दिया। मैं नीतीश जी का शुक्रगुजार हूं, अटल जी के कार्यकाल में नीतीश जी के कंधे से कंधे मिलाकर मैंने काम किया है। बिहार का सौभाग्य है कि एक बेहतरीन मुख्यमंत्री बिहार को मिले हैं। विधान परिषद के सदस्य के नाते हम भी उसमें अपना रोल अदा करते रहेंगे।

भास्कर : क्या बेहतरीन मंत्री बनने के तौर पर आप बिहार मंत्रिमंडल में शामिल हो रहे हैं?

शाहनवाज : मुझे इसके बारे में कोई सूचना नहीं है। मैं तो पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता हूं। इस नाते आपसे बात कर रहा हूं।

भास्कर : विधानसभा चुनाव में कोई मुस्लिम विधायक जदयू की तरफ से जीत कर नहीं आ सका। आलम यह है कि NDA में कोई मुस्लिम विधायक नहीं, ऐसे में कहा जा रहा है कि अब भाजपा इस मामले में खुद आगे बढ़ रही है और इसलिए आप बिहार लाए गए हैं?

शाहनवाज : देखिये मुझे लाया नहीं गया है, मैं पार्टी के कहने पर खुद चलकर आया हूं। मैंने जिंदगी में एक नियम रखा है कि कोई काम बड़ा-छोटा नहीं होता और हम जात-धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करते हैं, इसलिए तो मैं भाजपा में काम करता हूं। मेरे समर्थक हर जात-बिरादरी के लोग हैं। एक दिन में ये सब नहीं बनता। यह सही है कि मुस्लिम समाज को अपनी जागीर कुछ लोग समझते हैं। नीतीश जी ने तो बहुत काम किया था, लेकिन उनके 11 मुस्लिम उम्मीदवार में से कोई नहीं जीते। मन तो बहुत व्यथित होता है, जब आदमी काम करता है और रिजल्ट नहीं आता। बिहार में कोई दिक्कत नहीं है। मिलकर काम करेंगे। कहने के लिए जदयू-भाजपा है, लेकिन मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में सबलोग मिलकर काम करेंगे।

भास्कर : बिहार के कौन-से मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर आपको लगता है कि काम करने और फोकस करने की जरूरत है?

शाहनवाज : कुछ ज्यादा सोचा ही नहीं आज, क्योंकि सूचना मिली कि नामांकन करना है। रातभर कागज बनाया, सुबह नोटरी के पास गए और नामांकन कर दिया। बिहार के हर जिले से कोई ना कोई कार्यकर्ता पहुंचा था।

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