शताब्दी समारोह – दुनिया चैलेन्ज है मुकाबला करो : मौलाना फारुक

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मदरसा अल जामियतुल अरबिया अशरफुल उलूम कहवाँ के शताब्दी समारोह के दूसरे दिन भी लोगो मे उत्साह कायम है।स्थानीय लोगो के अलावा सीतामढ़ी से बाहर से भी लोग इस्लामी धर्मगुरु को सुनने पहुँच रहे है।शताब्दी समारोह की शुरुआत विधिवत कुरान पढ़ कर की इसके बाद बाहर से तसरीफ लाए बालासात पोखरैरा से मौलाना फारुक ने अपने ब्यान मे कहा दुनिया इम्तिहान है,अल्लाह के सभी नेमतो का शुक्र अदा करनी चाहिए,दुनिया चाईलेंज है सभी को मुकाबला करना है और दुनिया से एक दिन गुजर जाना है,आलीमो की सोहबत मे रहना चाहिए,हसद,अहंकार मनुष्य को नष्ट कर देती है

-आसाम से आए मौलाना समसुद्दीन ने कहा कि बिहार के इस इलाके मे पहली बार आया हु मै भी बिहार का ही हु लेकिन चालीस साल से आसाम मे शिक्षा देर रहा हूँ,शिक्षा देकर खुद को गौरवशाली महसूस होता है,मुसलमान गुरबत की जिंदगी जी रहा है।मुहम्मद ने कहा की जब तुम्हारे पास दौलत आयेगा तो लोग दिन से दुर हो जायेगा,शिक्षा ही जिल्लत को दुर कर सकता है,मोहम्मद की जिंदगी अपने जीवन मे उतारो खुद जिल्लत की दुनिया से बाहर हो जाओगे। नेक काम करोगे तो जिल्लत की जिंदगी से बाहर होगे। दुनिया के ज्यादा देश मे मुस्लिम कानून है ।मोहम्मद ने ताज को ठुकराया लेकिन अपने रास्ते को नही बदला।हर इंसान को अपने ईमान का जायजा लेना चाहिए।अल्लाह पर भरोसा करो कोई न कोई रास्ता बन ही जायेगा।मदरसा ,किताबी दावत ,दयानतदारी ही नमाज की पाबंदी ही हमे जिल्लत की जिंदगी से निकालेगा।

-यूपी के देवबंद से आए मौलान सोफियान कासमी ने कहा कि जिस्म 60-70 किलो व आत्मा 21ग्राम है शरीर का दो हिस्सा है।
सच्चर कमीटी की रिपोर्ट कहती है कि मुस्लिम 57% स्कूल जाते है। मात्र चार फीसदी ही मदरसा की ओर जाते है।बावजूद देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इस्लामी शिक्षा पाने वालों का होर लगा हुआ है। हिन्दुस्तान एक मजहबी देश है हम जहाँ बहुत शांति से रहते है दुसरे देशों की भांति। दुनिया परेशानी की जगह है।ईश्वर को याद करने से सभी कष्ट टल जाती है।रोजी मे बहोढ़तरी व गोपनीयता से देगा।मनुष्य गलती का पुतला है मगर ईश्वर से माफी मागने के बाद माफ हो जायेगा।किसी बराई से खुशी महसुस होती है। हम शोला को बुझाने मे लगे है एक वो है जो आग लगाने मे लगे है ।1866मे देवबंद मदरसा कायम हुआ था ।देश को आजादी दिलाने मे मुस्लिम का बरा योगदान है।

– हबीब अहमद बादबी साहब ने कहा कि अहसास झुटलाने वाले से अल्लाह मुह फेर लेता है।

-हैदराबाद से आए मौलाना उमर बिन आबदीन ने कहा कि सिर्फ इबादत करना ही हमारा धर्म नही है,हमरा धर्म गरीब,जरूरतमन्द,लाचार,बेसहारो को सहारा देना भी शामिल है।जो हमारे नबी के बताए हुए रास्ते है।एवं मौलाना मुफ़्ती मो शाहिद कासमी गुजरात व मौलाना तस्सवुर इंदौर ने भी शिक्षा में बेहतर करने से संबंधित विचार रखें।


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