मुजफ्फरपुर : सेंट्रल लाइब्रेरी का स्टडी सेंटर ऐसा करियर प्वाइंट जहां पढ़कर बन चुके हैं 400 से अधिक अधिकारी

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मुजफ्फरपुर (शिशिर कुमार). सेंट्रल लाइब्रेरी का इतिहास बीआरए बिहार विवि के इतिहास के समानांतर है। विवि कैंपस में 1972 में इसकी स्थापना हुई थी। उस वक्त विवि का प्रशासनिक भवन नहीं बना था। तत्कालीन वीसी डॉ. नागमणि इसी लाइब्रेरी में बैठते थे। उसी समय छात्रों के लिए स्टडी सेंटर खोला गया।

छात्रों को लाइब्रेरी से मनचाही किताबें भी मिलने लगीं। इस कारण धीरे-धीरे यह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का हब बन गया। 1996 में वीसी रहे डॉ. शकील अहमद ने इसकी अनुमति दी। उसके बाद से छात्र सुबह 6 बजे यहां पढ़ने आ जाते हैं और रात के 10 बजे निकलते हैं। 25 वर्षों में यहां से 400 से अधिक छात्र अधिकारी बन निकल चुके हैं। सैकड़ों निजी व सरकारी संस्थानों में कार्यरत हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों की मानें तो यह स्टडी सेंटर ही नहीं, उनके लिए करियर हब है। यहां पढ़ने वाले 95 फीसदी छात्र गरीब व सामान्य परिवार के हैं। हर साल 15-20 छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में अफसर पद पर सेलेक्ट होते हैं।

इस तरह पढ़ते हैं स्टूडेंट्स
100 के बैठने की है व्यवस्था, 125 से अधिक पढ़ते हैं।
समय बर्बाद न हो, इसलिए कई छात्र टिफिन मंगाते हैं।
विवि हर माह इन पर 4-5 हजार रुपए खर्च करता है।
आरओ के पानी व जेनरेटर की सुविधा है उपलब्ध।

छात्रों के लिए अगले माह से ई-लाइब्रेरी: कुलपति
कुलपति डॉ. राजेश सिंह ने कहा कि यह सिर्फ लाइब्रेरी नहीं, बल्कि ज्ञान और करियर का केंद्र है। छात्र दुनियाभर के पुस्तकालय से जुड़ सकें, इसलिए दूसरी मंजिल पर इसे ई-लाइब्रेरी के रूप में डेवलप किया जा रहा है। सारी तैयारी पूरी हो चुकी है। 24 अक्टूबर को राज्यपाल के हाथों उद्घाटन होगा। विवि की पुस्तकों का भी स्कैन किया जा रहा है। कंप्यूटर पर ही पुस्तकें खुलने लगेंगी।

हर साल 70-80 छात्रों का होता है सेलेक्शन
सेंटर पर अध्ययन कर रहे छात्रों ने बताया कि हर साल यहां से 70-80 स्टूडेंट सफल होते हैं, 15-20 तो अधिकारी बनते हैं। इस साल ही कई छात्रों का रेलवे, बैंक में हुआ है। एक की उम्र काफी हो गई थी। लेकिन, यहां आने पर रेलवे में नौकरी हो गई। कुछ समय पहले शंकर का सीआईएसएफ में कमांडेंट, संतोष कुमार का आर्मी में, जयप्रकाश का सीआरपीएफ में चयन हुआ।

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