अपने चार साथियों की जान बचाकर खुद शहीद हो परिहार सेना का जवान पुरुषोत्तम

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(दीपक कुमार). जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में पोस्टेड परिहार के सुतिहारा का बेटा पुरुषोत्तम कुमार हिमस्खलन में फंसे नौ साथियों में से चार साथियों की जान बचा खुद भी शहीद हो गया। शहीद पुरुषोत्तम का शव 14 जनवरी की शाम 05:00 बजे बर्फ के दल-दल में काफी छानबीन के बाद बरामद किया गया, जबकि उनके साथ रहे चार अन्य साथी जवान का शव 13 जनवरी को ही सैन्य अधिकारियों ने बरामद कर लिया गया था। शहीद के पिता शिवराम ठाकुर ने बताया कि 13 जनवरी की दोपहर 3:30 में जम्मू के सैन्य अधिकारियों ने सूचना दी कि पेट्रोलिंग पर निकले नौ जवान हिमस्खलन में फंस गए है।

चार जवानों को उनके बेटे शहीद पुरुषोत्तम ने बचा लिया। इसी बीच आए तेज तूफान में वह दोबारा बचे हुए चार साथियों के साथ बुरी तरह फंस गया। गाड़ी में रहने से चार जवानों के शव को तुरंत बरामद कर लिया गया, पर आपके बेटे पुरुषोत्तम की तलाश जारी है। घर वालों को मिली इस सूचना के बाद से चीत्कार मच गई। पत्नी, बेटे व बेटियों की रो-रो कर हालत खराब हो गई है। लगातार गया आर्मी के डॉक्टर शहीद की पत्नी का इलाज कर रहे हैं। इसके बाद 14 जनवरी की शाम 05:00 बजे शहीद का शव बरामद किया गया।

गया कॉलेज से की थी बीए पार्ट-वन की पढ़ाई
शहीद के पिता ने बताया कि उनका बड़ा बेटा काफी होनहार था। मैट्रिक का एग्जाम गया हाई स्कूल से दिया। इसके बाद इंटर की पढ़ाई महेश सिंह यादव कॉलेज से पूरी की। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए गया कॉलेज में एडमिशन कराया। पार्ट वन की परीक्षा भी दी और पार्ट टू में एडमिशन कराया। इसी वक्त सेना में चयन हो गया। पहली पोस्टिंग जम्मू में ही थी। इसके बाद बिकानेर, जोधपुर में भी ड्यूटी की। यहां से फिर जम्मू के कुपवाड़ा दूधी में कार्यरत था। सेना में ज्वाइंन के बाद 2005 में गया में भव्य तरीके से विवाह हुआ था। शहीद की दो बेटियां और एक बेटा है।

तुम अपनी सेहत का ख्याल रखना, यहां बर्फबारी काफी हो रही है, हो सकता है कल से कॉल आए या नहीं…
तुम ठीक से रहना…। अपनी सेहत का ख्याल रखना…। यहां बर्फबारी काफी हो रही है। हो सकता है कल से कॉल आएगा या नहीं…। 12 जनवरी को आखिरी बार शहीद जवान पुरुषोत्तम ने इन्हीं चंद शब्दों में अपनी पत्नी अर्चना से बात की। पत्नी की सेहत की चिंता पुरुषोत्तम को अक्सर लगी रहती थी। पत्नी अर्चना ने कहा कि मुझे क्या पता था? कि ये तीन शब्द उनके आखिरी शब्द है। इतना कह फिर से रोने लगी। बता दें कि 14 जनवरी को जब जम्मू के सैन्य अधिकारियों का फोन आया कि पुरुषोत्तम कुमार शहीद हो गए है तो यह बात सुन पत्नी बेहोश हो गई। गया आर्मी के डॉक्टर शहीद की पत्नी का इलाज कर रहे हैं। रो-रोकर पत्नी का बुरा हाल हो गया है। जूबां पर सिर्फ एक ही शब्द है कि हर वक्त वे मुझसे मेरी सेहत के बारे में पूछते थे।

जानकारी हो कि शहीद की पत्नी नवादा शाहपुर की रहने वाली है। यहीं से ग्रेजुशन की पढ़ाई भी पूरी की थी। शहीद पुरुषोत्तम की दो बेटियां और एक बेटा है। सबसे बड़ी बेटी 12 साल की अनामिका कुमारी व छोटी बेटी छह साल की लधिमा कुमारी है। नौ साल का एक बेटा पुष्कर है। तीनों बच्चे आर्मी स्कूल गेट नंबर पांच में पढ़ाई कर रहे हैं। सबसे छोटी बेटी को समझ में ही नहीं आ रहा कि आखिर मां क्यूं रो रही है? मां की गोद में बैठ उसके आंसू को पोंछती दिखीं। नन्हीं सी बेटी को पता ही नहीं कि उसके सर से उसके पिता का साया उठ चुका है। दादा सभी पोता-पोतियों को दिलासा दे रहे है कि वह हैं, सब ठीक हो जाएगा।

पिता ने कहा-उत्साह था देश को दो वीर सुपुत्र दिया
जब मेरे दो बेटे देश की सुरक्षा में कमान संभाले हुए थे। सीना चौड़ा था। उत्साह था देश को दो वीर सुपुत्र दिया। आज बड़ा बेटा शहीद हो गया है। गम है पर एक खुशी भी है कि उसने अंतिम घड़ी में भी खुद के जान की चिंता न की और अपने चार साथी को बचा लिया। बेटा पुरुषोत्तम काफी होनहार था। घर, परिवार सब की चिंता थी उसे। जब भी घर आता, पूरे मन से सारे काम करता। आंखों में नमी के बीच शहीद के पिता शिवराम ठाकुर ये बातें कहीं। कहा कि उनका बेटा पुरुषोत्तम नवंबर 2019 में ही एक माह की छुटिट्यों पर गया आया था। घर की बांड्री का कार्य कराया। 08 दिसंबर को जाने के वक्त मैने कहा कि बेटा अब मुझे मेरी जिम्मेवारी से मुक्त करो। कुछ दिन बचे है तीर्थस्थल पर जाना है। इस पर शहीद पुरुषोत्तम ने कहा कि पापा अगली बार जब मैं गया आऊंगा तो आपको जरूर तीर्थस्थल पर भेजूंगा। पिता ने कहा कि मुझे क्या पता कि मुझे तीर्थस्थल पर भेजने की बात कह खुद ही दुनियां छोड़ कर चला जाएगा। इतना कहते ही फिर पिता के आंखें नम हो गई। वहीं मृतक पुरुषोत्तम का मंझला भाई भी दिल्ली में एनएसजी का ब्लैक कमांडो है। भाई की मौत पर वह भी सहम गया है। वहीं शहीद का छोटा भाई बंगलौर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा हैं। पिता शिवराम ठाकुर गवर्नमेंट प्रेस गया में वेंडर थर्ड ग्रेड में कार्यरत थे।

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