RJD के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद ने इस्तीफा दिया

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राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्‍यक्ष जगदानंद सिंह ने RJD सुप्रीमो लालू यादव को अपने पद से इस्‍तीफा भेज दिया है। माना जा रहा है कि वह लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के व्यवहार से आहत हैं। वहीं, मीडिया में खबर आने के बाद RJD ने इस खबर को निराधार बताया है।

बताया जा रहा है कि उनके इस्तीफे को अभी तक लालू यादव और तेजस्वी यादव ने स्वीकार नहीं किया है। वे तेज प्रताप के उस बयान से नाराज बताए जा रहे हैं, जिसमें कहा था कि मैं लगता है अंकल नाराज हैं, हमारे भाषण पर ताली नहीं बजाते। तेज ने यह बयान पार्टी के स्थापना दिवस पर 5 जुलाई को दिया था।

इस्तीफे पर गोलमोल जवाब देते रहे जगदानंद

वहीं, पार्टी को अपना इस्तीफा भेजने के बावजूद दोपहर तक जगदानंद सिंह पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष के कमरे में बैठे दिखे। मीडिया ने उनसे इस्तीफे को लेकर सवाल पूछा। इस पर उन्होंने ना हां में जवाब दिया और ना न में। बस इतना कहा कि आप जो चाहे चला सकते हैं। उनसे जब पूछा गया कि क्या वो तेजप्रताप यादव के व्यवहार से दुखी हैं तो कहा कि ये सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए। इस दौरान मीडिया ने जगतानंद सिंह से उनके इस्तीफे से जुड़े कई और सवाल किए, लेकिन वो उन सबका गोल-मोल जवाब देते रहे।

5 जुलाई को RJD के स्थापना दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन करते प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव।

5 जुलाई को RJD के स्थापना दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन करते प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव।

तेज प्रताप ने मंच पर ही खोल दिया था मोर्चा

5 जुलाई को पार्टी के स्थापना दिवस के मंच से ही हसनपुर से राजद विधायक और लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने संगठन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। पार्टी दफ्तर में महिलाओं की जगह मांगने के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर भी तंज कसा था। कहा था कि लगता है जगदानंद अंकल मुझसे नाराज हैं।

बता दें कि इससे पहले 13 फरवरी को तेज प्रताप यादव ने राजद कार्यालय के भीतर हंगामा खड़ा कर दिया था। तेज प्रताप ने प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद लालू यादव और राबड़ी देवी को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

इस्तीफा RJD की बढ़ा सकती है परेशानी

जगदानंद सिंह के इस्तीफे की पुष्टि राजद की तरफ से नहीं की गई है, लेकिन अगर ऐसा होता है तो ये राजद के लिए बड़ा नुकसान है। सत्ताधारी पार्टी जदयू और भाजपा पहले से ही राजद पर अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाती रही हैं। जगदानंद सिंह राजपूत जाति से आते हैं। इसी जाति से दिवंगत रघुवंश प्रसाद सिंह आते थे। आखिरी दिनों में रघुवंश सिंह ने पार्टी छोड़ दी थी।

हालांकि, लालू प्रसाद की तरफ से उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ था और इसी बीच रघुवंश सिंह की मौत हो गई। अब अगर जगदानंद सिंह राजद से अलग होते हैं तो फिर इसी जाति के एक नेता को बेइज्जत करने के आरोप राजद पर लगेंगे। इससे इस जाति के वोटरों में राजद के प्रति नाराजगी बढ़ सकती है। यही वजह है कि राजद ने इस पूरी चर्चा को निराधार बताया है।

नवंबर 2019 में जगदानंद सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष की संभाली थी कमान। इस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्व से गले मिलते जगदानंद।

नवंबर 2019 में जगदानंद सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष की संभाली थी कमान। इस दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्व से गले मिलते जगदानंद।

लालू ने भाषण में डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी

तेज प्रताप के भाषण के बाद लालू ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी। राजद सुप्रीमो ने कहा था कि जगदानंद सिंह मेरे भाई समान हैं और उन्हें मैं हमेशा भाई ही कहता हूं। जगदानंद सिंह की स्पीच बेहद ही उत्तेजित और धारदार होती है। जगदानंद भाई को सभी विषयों की भरपूर जानकारी है।

जगदानंद सिंह को कमान सौंपकर लालू ने चला था बड़ा दांव

जानकार बताते हैं कि जगदानंद सिंह को पार्टी की प्रदेश इकाई की कमान सौंपकर लालू यादव ने बड़ा दांव चला था। जिस वक्‍त जगदानंद सिंह प्रदेश अध्‍यक्ष बनाए गए थे उससे कुछ समय पहले ही सवर्ण आरक्षण बिल का विरोध करने के चलते एक बड़े वर्ग में राजद को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिल रही थी।

2019 के लोकसभा चुनाव में राजद एक भी सीट नहीं जीत सकी। रघुवंश प्रसाद सिंह समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चुनाव हार गए थे। ऐसे में जगदानंद सिंह को पार्टी की कमान सौंपकर लालू यादव ने बड़ा दांव चला था। पार्टी सवर्णों में यह संदेश नहीं देना चाहती थी कि राजद अगड़ी जाति के खिलाफ है।

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