अपने मन से चलने वाले अधिकारी हैं त्रिपुरारी शरण, दो फिल्में बनाई हैं, कुंवर सिंह पर बने सीरियल में अंग्रेज अफसर का रोल भी किया

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त्रिपुरारी शरण बिहार के नए मुख्य सचिव बनाए गए हैं। वे अपने मन मुताबिक चलने वाले IAS अफसर हैं। जिस विभाग में रहे, मंत्री इनसे मनमानी नहीं करवा पाए। यानी मैनेज होनेवाले नहीं हैं। उनके इस अक्खड़पन को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी जानते हैं. इसलिए त्रिपुरारी शरण के सीनियर होने के बावजूद उन्होंने अरुण कुमार सिंह को मुख्य सचिव बनाया था। इस बार भी सिर्फ इसलिए मुख्य सचिव बनाए गए कि उनका रिटायरमेंट जून में होने वाला है। जब इन्हें ओवरटेक कर अरुण कुमार सिंह को मुख्य सचिव बनाया गया था, तब त्रिपुरारी शरण दुखी भी हुए थे। उन्हें डेवलपमेंट कमिश्नर तक नहीं बनाया गया। अभी अरुण कुमार सिंह, कोविड महामारी के शिकार हुए हैं और मुख्यमंत्री सब कुछ खुद मॉनिटर कर रहे हैं, तब त्रिपुरारी शरण को मुख्य सचिव बनाया गया है।

मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं, दूरदर्शन में महानिदेशक रह चुके हैं

त्रिपुरारी शरण बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। सैनिक स्कूल तिलैया से पढ़ाई की है। वे भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे में डायरेक्टर रह चुके हैं। वहां उनके द्वारा किए गए कार्य को लोग आज भी याद करते हैं। बंद पड़े एक्टिंग कोर्स को फिर से इन्होंने शुरू करवाया था। वे दूरदर्शन के महानिदेशक भी रह चुके हैं। दूरदर्शन से इन्होंने ‘दृश्यांतर’ पत्रिका निकलवायी थी जिसके संपादक अजीत राय थे। इस पत्रिका की चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर होती रही।

दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में आमिर खान से बात करते हुए।

दूरदर्शन के एक कार्यक्रम में आमिर खान से बात करते हुए।

दो फीचर फिल्मों का डायरेक्शन किया

त्रिपुरारी शरण ने दो फिल्में भी बनाई हैं। एक का नाम है ‘वो सुबह किधर निकल गई’ और दूसरी फिल्म है ‘कभी दिन चले न रात’। दोनों फीचर फिल्मों का डायरेक्शन खुद किया है। एक्टिंग में भी इनकी रुचि है। प्रकाश झा ने बाबू कुंवर सिंह पर एक सीरियल बनाया था ‘विद्रोह’, उसमें त्रिपुरारी शरण ने अंग्रेज अफसर का रोल किया था।

मशहूर शायर गुलजार के साथ।

मशहूर शायर गुलजार के साथ।

बड़ा सोचते हैं, शास्त्रीय संगीत में गहरी रुचि रखते हैं

इनकी गहरी रुचि और समझदारी शास्त्रीय संगीत में है। इसलिए इससे जुड़े कार्यक्रमों में इनकी उपस्थिति जरूर दिखती है। इंटरनेशनल सिनेमा का बेहतरीन कलेक्शन इनके पास है। फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम कहते हैं कि फिल्म, गायन, अभिनय की इतनी अच्छी समझ रखने वाले अफसर बिहार में कोई और नहीं दिखते। वे बड़ा सोचते हैं।

पत्नी भी IAS रह चुकी हैं

त्रिपुरारी डॉग के बड़े शौकीन हैं। उनके यहां आदमकद दो डॉग हैं। दोनों को वे अपने बच्चे की तरह प्यार करते हैं। पत्नी सुजाता प्रसाद भी IAS हैं। वह भारत सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय में संस्कृति सचिव थीं। अब रिटायर हो चुकी हैं। पुत्र विवान शरण अर्थशास्त्री हैं जिनकी किताब आई है- Wonked!: India in Search of an Economic Ideology.

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