अयांश लड़ रहा है जिंदगी की जंग, पिता जेल में, बाप ने 10 साल पहले के फ्रॉड केस में खुद सरेंडर किया

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SMA बीमारी से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे अयांश की स्टोरी में एक नया एंगल जुड़ गया है। बेटा मौत के मुहाने पर है। उधर, पिता आलोक सिंह अपने ही कारनामों की वजह से जेल पहुंच गए हैं। आलोक सिंह के जेल जाने की खबर आते ही मासूम की जिंदगी बचाने की मुहिम की रफ्तार थम गई है। लोगों के बीच अयांश के पिता की छवि नेगेटिव होने लगी है। पिता के कर्मों का खामियाजा अब बेटे को भुगतना पड़ रहा है।

अयांश की जिंदगी के लिए मन्नतें मांग रही उसकी मां भी पति के पूर्व कर्मों की वजह से शांत पड़ गई है। अयांश के पिता आलोक सिंह हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने धोखाधड़ी की है, जालसाजी की है। गलत तरीके और झूठी जानकारी देकर बच्चों का अपने मर्चेंट नेवी के कॉलेज में दाखिला दिलाया।

10 साल पहले जालसाजी का दर्ज हुआ था केस

SMA बीमारी के शिकार मासूम अयांश की जिंदगी बचाने की मुहिम धीमी पड़ गई है। यह तब से हुआ है, जब से अयांश के पिता आलोक सिंह का रांची वाला मामला सामने आया है। आलोक के खिलाफ रांची के पंडरा थाना में 2011 में ही जालसाजी का एक केस दर्ज हुआ था। करीब 10 साल बाद यह मामला सबके सामने आया, वो भी तब जब अयांश की जिंदगी को बचाने के लिए बड़े स्तर पर जन अभियान चलाया जा रहा था। मंगलवार को अयांश के पिता ने उस पुराने केस में रांची जाकर कोर्ट में खुद को सरेंडर कर दिया। वहां से उन्हें कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया गया। पिता अब सलाखों के पीछे हैं। पटना स्थित घर पर बीमार अयांश समेत दो बच्चों को लेकर पत्नी नेहा सिंह अकेले पड़ गई हैं।

भास्कर की टीम पहुंची अयांश के घर
ताजा हालात जानने के लिए भास्कर टीम पटना स्थित घर पहुंची। अयांश की मां नेहा सिंह से पूरे मामले पर बात की। बातचीत में नेहा ने बताया कि उन्हें आलोक के रांची वाले केस की जानकारी बिल्कुल भी नहीं थी। लेकिन, जब से वो मामला सामने आया है उसके बाद से बीमार बेटे के लिए जन अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई है। अपने राज्य के साथ-साथ देश-विदेश से मदद के लिए मिल रहे रुपए बहुत कम आ रहे हैं। लोगों की मदद से अब तक 6 करोड़ 85 लाख रुपए ही जमा हो पाए हैं। जबकि, इंजेक्शन के लिए जरूरत 16 करोड़ रुपए की है।

मदद जारी रखने की अपील
अयांश की मां का मानना है कि काफी सारे लोग अब उनके पति के बारे में कुछ आपत्तिजनक बातें भी करने लगे हैं लोग बढ़ा-चढ़ाकर तरह-तरह की गलत अफवाह भी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। गलत प्रचार की वजह से इसका कुप्रभाव उनके बीमार बच्चे के इलाज के लिए जुटाए जा रहे मुहिम पर पड़ सकता है। नेहा सिंह ने अपील की है कि लोगों की पहली प्राथमिकता आयांश के बचाने की होनी चाहिए। इसलिए लोग पहले की तरह आर्थिक मदद जारी रखें।

राज्य सरकार से नहीं मिली मदद
आयांश की मां ने कहा कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने 12 लाख रुपए के आर्थिक मदद करने का आश्वासन दिया था। हां, 20 दिन से अधिक गुजर जाने के बाद भी उनकी यह मदद अब तक नहीं मिली। उन्होंने बताया कि मंत्री मुकेश सहनी, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव, स्थानीय विधायक रीतलाल यादव सहित कुछ राजनेताओं के द्वारा भी सहयोग राशि मिली है। जो नाकाफी है। राज्य सरकार के स्तर पर कोई मदद नहीं मिली।

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