आदर्श पंचायत निर्माण को लेकर युवा प्रियंका कुमारी ने मुखिया पद पर दिया नामांकन

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि असली स्वराज गांव के लोगों के हाथ में शासन की बागडोर देने से आएगा। 73 वें संविधान संशोधन के बाद पंचायत को संवैधानिक दर्जा तो दिया जा चुका है। लेकिन अभी भी विकेंद्रीकरण का सपना अधूरा है। गांव के लोग अपने ही पंचायत के काम में पारदर्शिता और भागीदारी को लेकर वंचित है। इसी बात के मद्देनजर नागरिक संगठन ‘ग्राम-चेतना-आंदोलन’ बिशनपुर गोनाही पंचायत के प्रत्येक वार्ड में चेतना-चौपाल का आयोजन करती रही है। आंदोलन ने तय किया है कि पंचायत चुनाव में सैद्धान्तिक भागीदारी करके स्थानीय चुनावी राजनीति को विकल्प दिया जाएं।

आंदोलन से जुड़ी प्रियंका ने कुछ वार्ड सदस्य उम्मीदवार के साथ प्रखंड मुख्यालय में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। प्रियंका कहती है कि महिला आरक्षित सीट होने के बावजूद प्रतिनिधि पति का जिसप्रकार से दबदबा है उससे महिला आरक्षण की भावना पूरी तरीके से धूमिल हो जाती है। और आबादी का आधा हिस्सा अपने प्रतिनिधित्त्व से वंचित रह जाता है। यह संविधान और लोकतंत्र का अपमान है। उन्होंने जोड़ देकर कहाँ की मेरे जैसे सैकड़ों-हज़ारो युवाओं और युवतियों को गांव लौटकर ग्रामीण राजनिति को अपने हाथों में लेने की ज़रूरत है।

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प्रियंका जी अपने टीम के साथ बिशनपुर गोनाही पंचायत में ग्राम स्वराज के मुहिम पर पिछले साल भर से लगी है। उनका कहना है कि जबतक जनता एक वोटर होने से आगे ग्राम-सभा के माननीय सदस्य होने की जिम्मेवारी से वाकिफ नहीं होती पंचायती राज का असली सपना अधूरा रहेगा। इसीलिए वे अपने टीम के साथ पंचायत के घर-घर जाकर पंचायती राज अधिनियम पर जनसंवाद कर रही है और इस विषय पर वार्ड-सभा आयोजित कर रही है। इस सिलसिले में वे पंचायत के बजट की चर्चा करती रही है औरआम जनता के नागरिक हैसियत पर संवाद करती रही है। वे आगे कहती है कि युवाओं और पढ़े-लिखे लोगों को पंचायत चुनाव में भी सैद्धान्तिक भागीदारी करनी होगी। तभी जाकर गाँव के इस बदहाल हालात में सुधार आएगा। आने वाले पंचायत चुनाव में वो इसी विषय पर कैम्पेन आयोजिति करने जा रही है। नॉमिनेशन के बाद एक जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहाँ की पंचायत चुनाव ही वो महत्त्वपूर्ण मौका है जब हम अपने चुनावी संस्कृति को भी ठीक करने पर काम कर सकते है। और इसी से हमारा लोकतंत्र और ज्यादा समावेशी और जनकल्याणकारी बन सकता है। आने वाले दिनों में ग्राम-चेतना आन्दोलन कि टीम ग्राम-सभा, वार्ड-सभा, पारदर्शिता, सोशल-ऑडिट, भागीदारी को चुनावी मुद्दा बनाने पर अपनी मुहिम तेज़ करेंगी।

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