एक उमाकांत यादव की बेटी की शादी में चीफ गेस्ट थे पप्पू, दूसरे ने कहा- तब कंफ्यूजन में हुआ था केस

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कहानी पूरी फिल्मी लग रही है, लेकिन है सोलह आने सच। जी हां, 32 साल पुराने जिन दो व्यक्तियों के अपहरण कांड में जाप सुपीमो पूर्व सांसद पप्पू यादव गिरफ्तार किए गए हैं। वारंट की अवधि में उन्हीं में से एक की बेटी की शादी में दूल्हा पक्ष से 17 फरवरी को चीफ गेस्ट बने थे। वर-वधु को उन्होंने आशीर्वाद दिया था। आज इस प्रकरण के बाद वे चुप हैं। हालांकि दूसरे अपहृत रामकुमार यादव अब मीडिया के समक्ष आए और इसे कन्फ्यूजन का केस करार दिया। वे कहते हैं कि उमाकांत यादव बौआ जी (मुरलीगंज नगर परिषद के चेयरमैन) के ससुर हैं। पर, उमाकांत यादव इस केस के सम्बंध में कुछ भी नहीं बोलना चाहते हैं। दो दिनों से जब से यह प्रकरण तेज हुआ है, वे किसी मीडियाकर्मी से बात नहीं कर रहे हैं।

दरअसल, उमाकांत यादव उर्फ उमाकांत राय की बेटी रूपम की शादी मधेपुरा जिला परिषद अध्यक्ष मंजू देवी के पुत्र श्वेत कमल उर्फ बौआ यादव से 17 फरवरी 2021 को मधेपुरा स्थित जिला परिषद आवास पर हुई थी। श्वेत कमल कभी पप्पू यादव के खास हुआ करते थे। इस शादी में पप्पू यादव भी प्रमुख अतिथि के रूप में आए थे। इस दौरान उन्होंने नवदंपती को आशीर्वाद दिया था।

कभी साथ रहते थे पप्पू यादव व कथित दोनों अपहृत

दरअसल, 1989 के वर्षों में पप्पू यादव, रामकुमार यादव और उमाकांत यादव उर्फ उमाकांत राय एक साथ ही रहते थे। इस बीच गुट के ही एक युवक द्वारा एक लड़की से शादी कर लेने के कारण पप्पू यादव का रामकुमार यादव व उमाकांत यादव से मतभेद गहरा गया। इसी बीच 29 जनवरी 1989 को रामकुमार यादव के चचेरे भाई शैलेन्द्र यादव ने मुरलीगंज थाना में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि पप्पू यादव ने दिनदहाड़े रामकुमार यादव और उमाकांत यादव को जान से मारने की नीयत से अपहरण कर लिया।

अब रामकुमार यादव कहते हैं कि ऐसा मामला नहीं था। वे कहते हैं कि उस दिन जब पप्पू यादव की गाड़ी में हम लोग बैठकर गए तो लोगों को लगा कि अपहरण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि उसी दिन वे लोग पप्पू यादव के पास से निकलकर मधेपुरा आ गए। लेकिन उन लोगों पर दर्ज एक केस में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

पहला वारंट रास्ते में गिरा, सात माह बाद दूसरा वारंट लिया, फिर भी गिरफ्तारी नहीं

एमपी-एमएलए से संबंधित मामलों की सुनवाई एसीजेएम-फर्स्ट के कोर्ट में होती है। रामकुमार यादव व उमाकांत यादव के अपहरण का केस भी एसीजेएम-फर्स्ट की कोर्ट में है। बेल टूटने के बाद कोर्ट से 10 फरवरी 2020 को गैर जमानती धाराओं में पप्पू यादव के खिलाफ वारंट जारी किया गया। वारंट एसपी के कार्यालय गया। वहां से कुमारखंड थाना को डिस्पैच किया गया। लेकिन थाने तक वारंट नहीं पहुंचा।

19 सितंबर 2020 को कुमारखंड के थानाध्यक्ष सियावर मंडल ने कोर्ट को वारंट की दूसरी कॉपी जारी करने की मांग की। तर्क कमाल का था। कोर्ट को कहा गया कि चौकीदार संजीव कुमार वारंट लेकर एसपी कार्यालय से चला, लेकिन वारंट रास्ते में कहीं गिर गया। थानाध्यक्ष को मिला ही नहीं। पूर्व के थानाध्यक्ष दीपकचंद्र दास ने भी यही बात कही। इसलिए वारंट की दूसरी कॉपी जारी करने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने पुराने वारंट को रद्द करते हुए, दोबारा वारंट जारी कर दिया।

साथ ही कोर्ट ने कार्यालय को आदेश दिया कि “विद्वान” एसपी को वारंट इंड्यूस किया जाए। जबकि “विद्वान” एसपी को निर्देश दिया कि अविलंब वारंट का तामिल कराएं। लेकिन एक साल तीन माह यानि 454 दिन तक पुलिस कागजी प्रक्रियाओं में ही समय बिताती रही। यह भी संभव था कि अगर पप्पू यादव का नया प्रकरण नहीं शुरू होता, तो उनकी गिरफ्तारी भी नहीं हो पाती।

कुर्की के लिए 8 अप्रैल को सीओ से मांगा संपत्ति का ब्यौरा

19 सितंबर को दोबारा मिले वारंट के बाद भी पुलिस पप्पू यादव को गिरफ्तार नहीं कर पाई। जबकि वे हमेशा से सुर्खियों में रहे। इस बीच कुर्की का आदेश भी निकल गया। इसके बाद कुर्की से संबंधित कार्रवाई के लिए एसपी ने कुमारखंड पुलिस को 25 मार्च को पत्र जारी किया। इसके बाद कुमारखंड थाने से 8 अप्रैल को सीओ को पत्र भेजकर खुर्दा निवासी पूर्व सांसद पप्पू यादव की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा मांगा गया। सीओ ने मामले को सीआई को रेफर कर दिया, जो प्रक्रियाधीन है।

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