चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू को झारखंड हाईकोर्ट ने जमानत दी, पता और मोबाइल नंबर नहीं बदल सकेंगे

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चारा घोटाले में सजा काट रहे RJD सुप्रीमो लालू यादव को झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्हें एक लाख रुपए का मुचलका और 10 लाख रुपए जुर्माना देना होगा। बेल बॉन्ड भरने के बाद वे एक-दो दिन में छूट जाएंगे। लालू को सवा तीन साल बाद जमानत मिली है। चारा घोटाले से जुड़े एक केस में लालू 23 दिसंबर 2017 को जेल गए थे।

कोर्ट ने लालू के सामने 2 शर्तें रखी हैं-

1. जमानत के दौरान लालू हाईकोर्ट से परमिशन लिए बिना देश से बाहर नहीं जाएंगे।
2. वे अपना मोबाइल नंबर और पता भी नहीं बदलेंगे।

लालू यादव को सशर्त जमानत दुमका ट्रेजरी मामले में आधी सजा पूरी होने के बाद दी गई है। इससे पहले लालू यादव को अक्टूबर 2020 में चाईबासा ट्रेजरी मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन दुमका ट्रेजरी केस की वजह से उनकी रिहाई नहीं हुई थी। वहीं डोरंडा ट्रेजरी से निकासी के मामले की सुनवाई अभी पूरी नहीं हुई है। इस मामले में बहस चल रही थी, लेकिन कोविड की वजह से फिलहाल CBI कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगा दी गई है।

तेजस्वी बोले- जमानत की खुशी, लेकिन सेहत की चिंता
हाईकोर्ट के आदेश के बाद लालू यादव के बेटे तेजस्वी ने कहा, ‘हमें न्याय मिलने का भरोसा था। लालू जी अपनी आधी सजा काट चुके हैं। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर उन्हें जमानत दी है। हम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हैं। लालू जी को जमानत मिलने की खुशी है, लेकिन उनकी सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है। वे AIIMS में भर्ती हैं और कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनका इलाज जारी रहेगा। गरीब लोग खासतौर पर खुश हैं कि उनका मसीहा अब बाहर आ जाएगा।’

एम्स में भर्ती हैं लालू
लालू यादव फिलहाल एम्स दिल्ली में इलाज करवा रहे हैं। करीब ढाई साल रिम्स रांची में इलाज कराने के बाद जनवरी में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी के चलते उन्हें 23 जनवरी 2021 को रिम्स से एम्स रेफर किया गया था।

चारा घोटाले के इन 4 मामलों में लालू को सजा सुनाई जा चुकी है

पहला मामला
चाईबासा ट्रेजरी केस
37.7 करोड़ रुपए अवैध निकासी का आरोप
लालू प्रसाद समेत 44 अभियुक्त
मामले में 5 साल की सजा

दूसरा मामला
देवघर ट्रेजरी
84.53 लाख रुपए की अवैध निकासी का आरोप
लालू समेत 38 पर केस
लालू प्रसाद को साढ़े तीन साल की सजा

तीसरा मामला
चाईबासा ट्रेजरी
33.67 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का आरोप
लालू प्रसाद समेत 56 आरोपी
5 साल की सजा

चौथा मामला
दुमका ट्रेजरी
3.13 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का मामला
दो अलग-अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा

लालू को कब-कब जेल जाना पड़ा?
30 जुलाई 1997: पहली बार लालू यादव को जेल जाना पड़ा। इस दौरान कुल 135 दिन जेल में रहे।
28 अक्टूबर 1998: दूसरी बार जेल गए। 73 दिन बाद बाहर निकले।
5 अप्रैल 2000: तीसरी बार जेल गए। 11 दिन बाद जमानत मिली।
28 नवंबर 2000: आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक दिन के लिए जेल गए।
3 अक्टूबर 2013: चारा घोटाले से जुडे़ एक मामले में दोषी साबित होने के बाद जेल गए। 70 दिन बाद बाहर निकले।
23 दिसंबर 2017: चारा घोटाले से जुड़े एक केस में सजा होने के बाद जेल गए। अब जमानत मिली है।

चारा घोटाले में कब-क्या हुआ?
27 जनवरी 1996: पशुओं के चारा घोटाले के रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट का पता चला। चाईबासा ट्रेजरी से गलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपए निकाले गए थे।
11 मार्च 1996: पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले की जांच के लिए CBI को निर्देश दिए।
19 मार्च 1996: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बेंच को निगरानी करने को कहा।
27 जुलाई 1997: CBI ने लालू प्रसाद यादव पर शिकंजा कसा।
30 जुलाई 1997: लालू प्रसाद ने CBI अदालत के सामने सरेंडर किया।
19 अगस्त 1998: लालू और राबड़ी देवी के खिलाफ आय से ज्यादा संपत्ति का मामला दर्ज कराया गया।
4 अगस्त 2000: लालू के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज हुआ और राबड़ी देवी को सह-आरोपी बनाया गया।
5 अगस्त 2000: लालू और राबड़ी ने सरेंडर किया, राबड़ी को जमानत मिली।
9 जून 2000: कोर्ट में लालू के खिलाफ आरोप तय हुए।
अक्टूबर 2001: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नए राज्य में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद लालू ने झारखंड में सरेंडर किया।
18 दिसम्बर 2006: लालू और राबड़ी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्लीन चिट मिली।
2000 से 2012 तक: मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान कई गवाहों की मौत हो गयी।
17 मई 2012: CBI कोर्ट में लालू नए आरोप तय हुए। इसमें दिसम्बर 1995 और जनवरी 1996 के बीच दुमका ट्रेजरी से 3.13 करोड़ रुपए की निकासी का मामला भी शामिल।
17 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
30 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद यादव दोषी करार दिए गए।

CBI ने कहा था- ये सामान्य नहीं व्यापक षडयंत्र का मामला है
चारा घोटाले को लेकर CBI का कहना था कि ये सामान्य आर्थिक भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि व्यापक षड्यंत्र का मामला है जिसमें राज्य के कर्मचारी, नेता और व्यापारी वर्ग समान रूप से भागीदार थे। यह केस सिर्फ RJD तक भी सीमित नहीं रहा। इस सिलसिले में बिहार के एक और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र समेत राज्य के कई मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई थी।

जब सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था हाईकोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें उसने लालू के खिलाफ चारा घोटाले में आपराधिक साजिश की जांच खत्म कर दी थी। हाईकोर्ट ने तब तर्क दिया था कि जिस शख्स को दोषी ठहरा दिया गया है या बरी कर दिया गया है, उसे फिर से उसी मामले में जांच के दायरे में नहीं लाया जा सकता है। इसके बाद CBI ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लालू के खिलाफ चारा घोटाले में अलग-अलग जांच जारी रहेगी।

कहां हो सुनवाई इस पर ही हुई थी लंबी बहस
मामले के तेजी से निबटारे में बहुत सारी बाधाएं आईं। पहले तो इसी पर लंबी कानूनी बहस चलती रही कि बिहार से अलग होकर बने झारखंड राज्य के मामलों की सुनवाई पटना हाईकोर्ट में होगी या रांची हाईकोर्ट में।

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