जानिए, हू इज तेजप्रताप यादव?

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तेज प्रताप यादव और जगदानंद सिंह के बीच का विवाद अभी थमा नहीं है। RJD के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने पहले तो कहा था कि किसी से कोई नाराजगी नहीं है और फिर जब गुस्सा फूटा तो मीडिया वालों से ही पूछ दिया- हू इज तेजप्रताप? आप भी जानना चाहते होंगे हू इज तेजप्रताप ? भास्कर आपको बता रहा है कि राजद में क्यों चर्चा में रहते हैं तेज प्रताप। बिहार के एक खास तबके में तेज प्रताप के समर्थक भी बड़ी संख्या में हैं। समर्थकों को उनका देशज अंदाज लालू प्रसाद से मिलता हुआ लगता है।

अपनों का भी खुल कर विरोध करने की ताकत है
तेज प्रताप यादव की सबसे बड़ी पहचान है कि वे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के बड़े बेटे हैं। दूसरी बड़ी पहचान है कि वे लालू प्रसाद की पार्टी में एकमात्र ऐसे नेता हैं जो खुले मंच से प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ बोलते हैं। फिर भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वे कहते हैं कि उन्हें सिर्फ भगवान से और पिता लालू प्रसाद से ही दुनिया में डर लगता है। वे खुद को श्रीकृष्ण और अपने भाई तेजस्वी यादव को अर्जुन कहते हैं।

लेकिन, जब बोलने की बारी आती है तो तेजस्वी यादव को भी नहीं बख्शते और खुद अर्जुन की तरह दनादन तरकस खाली करने लगते हैं। गुस्साए तो कह दिया कि बिहार की जनता बाढ़ में डूब रही है और तेजस्वी यादव दिल्ली चले गए हैं। वे अपने मिजाज वाले नेता हैं। कोई टीवी एंकर उनको डिमोरलाइज नहीं कर सकता। वे एग्रेसिव रहते हैं। वे माननीय हैं क्योंकि हसनपुर विधान सभा की जनता ने उन्हें अपना विधायक चुना है। हसनपुर, खगड़िया लोकसभा में पड़ता है।

बिना तेजस्वी के पोस्टर कितने लगवाया, पता ही नहीं !
लालू के बड़े लाल खुद कहते हैं कि उन्हें राजनीति में आने के लिए पिता की तरह बहुत संघर्ष नहीं करना पड़ा। वे विरोधियों पर प्रहार करते हैं लेकिन उनकी बड़ी पहचान है अपने वैसे लोगों के खिलाफ बोलना। जिसके खिलाफ पार्टी के अंदर चूं-चपड़ नहीं होती। वे कहते हैं गलत का वे विरोध करेंगे ही, चाहे वह कोई हो। यह और बात है उनको नहीं पता कि छात्र राजद के आयोजन के समय बिना तेजस्वी यादव वाला पोस्टर किसने लगवाया !

तेजस्वी के खिलाफ उनका गुस्सा पहली बार नहीं फूटा है। बल्कि, 2015 में चुनाव के बाद भी भड़का था। 2015 में वे पहली बार वैशाली जिले के महुआ विधान सभा से चुनाव लड़े और जीते। वे नवंबर 2015 से जुलाई 2017 तक नीतीश कुमार की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे। दिसंबर 2015 में वे बिहार सरकार में पर्यावरण मंत्री भी हुए।

12 वीं तक पढ़ाई की

33 वर्षीय तेजप्रताप ने विधान सभा चुनाव में जो हलफनामा दिया है। उसके अनुसार 12 वीं तक की पढ़ाई की है। टोटल एसेट 2.8 करोड़ की बतायी जबकि कुल लाइबलिटिज 17.6 लाख की। तेज की शादी चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से हुई। लेकिन शादी के बाद हुए विवाद की वजह से मामला कोर्ट में है।

शिव, कृष्ण भक्ति से लेकर पशु प्रेम वाले तेज प्रताप

तेज प्रताप का मन अध्यात्म में खूब रमता है। अपने सरकारी आवास में ऊपरी तल पर उन्होंने राधा कृष्ण और महाकाल की पूजा की व्यवस्था की है। कई बार उन्हें कृष्ण की वेशभूषा में भी देखा गया, कई बार महादेव की वेशभूषा में । कभी उन्हें बांसुरी बजाते हुए देखा गया तो कभी शंख बजाते। आवास पर गायों के अलावा दो घोड़े और साइबेरियन हस्की नस्ल के चार डॉग भी उन्होंने पाल रखे हैं। इनके नाम हैं- स्काइलर, स्पार्क, ब्रूनो और लियो।

कभी पूजा करते तो कभी कैटवॉक करते हुए उनके वीडियो खूब वायरल हुए। वृंदावन उनका प्रिय धार्मिक स्थल है। वे जब वहां जाते हैं तो जिंस छोड़ धोती-कुर्ता में नजर आने लगते हैं। तेजप्रताप हर दिन पूजा जरूर करते हैं और ललाट पर त्रिपुंड या तिलक लगाना नहीं भूलते। अब लालू-राबड़ी के नाम पर एलआर अगरबत्ती फैक्ट्री उन्होंने पटना के लालू खटाल में लगाई है।

अकेले पड़ते जा रहे तेज प्रताप
लालू प्रसाद ने दोनों बेटों को एक साथ राजनीति में इंट्री दी। लालू प्रसाद दोनों के गुण-अवगुण जानते हैं, इसलिए छोटे बेटे तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री बनाया और बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को स्वास्थ्य मंत्री। जब नीतीश सरकार में शपथ लेने के बारी आई तो नीतीश कुमार के बाद इन्हीं दोनों भाइयों ने शपथ ली थी। उसके बाद ही विजेन्द्र यादव की बारी आई थी। इस हनक के साथ तेज की इंट्री राजनीति में कराई गई। लोकसभा चुनाव में तीन-चार सीटों पर तेजप्रताप ने पार्टी के खिलाफ खेल करने की कोशिश की।

जहानाबाद में तो इसी वजह से JDU के चंद्रेश्वर चंद्रवंशी चुनाव जीत गए। लेकिन अब वह समय नहीं रहा। अब राष्ट्रीय जनता दल पर तेजस्वी की मजबूत पकड़ है। वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं और लालू प्रसाद सहित जगदानंद सिंह जैसे नेताओं का भी उन्हें समर्थन प्राप्त है। अब तो छोटे भाई तेजस्वी यादव ने भी उन्हें अनुशासन में रहने को कह दिया है। उनके प्रबल समर्थक छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष आकाश को पद से हटाया जा चुका है और तेजस्वी समर्थक गगन यादव को पद दे दिया गया है। इससे पहले आकाश के कई फोटो पर कालिख भी किसी ने पोत दिया।

लालू के खास जगदानंद सिंह, तेजस्वी के खास संजय यादव

क्या तेजप्रताप यादव पार्टी में अकेले पड़ते जा रहे हैं? यह सवाल भी उठने लगा है। लालू परिवार का साथ तेजस्वी यादव के साथ है। इसलिए किसी का कोई बयान नहीं आया। बहन डॉ.रोहिणी आचार्या ने भी संयम और अनुशासन में रहने की सीख तेजप्रताप को दी। तेजप्रताप पहले तो प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को हटाने की जिद पर थे और अब तेजस्वी के रणनीतिकार संजय यादव को हटाने की मांग कर रहे हैं।

लालू प्रसाद या तेजस्वी यादव उनकी दोनों में से कोई भी मांग नहीं मानेंगे। जगदानंद सिंह अनुशासन के पक्के हैं। लालू प्रसाद के मित्र हैं। दल के लिए अपने बेटे को चुनाव हराने का इतिहास है उनके पास। संजय यादव की खासियत यह कि यह उनकी ही रणनीति ही थी कि तेजस्वी ने उपेन्द्र कुशवाहा व मुकेश सहनी को महागठबंधन से अलग किया और इतनी सीटें ला पाए। जैसे जगदानंद सिंह, लालू प्रसाद के खास हैं वैसे ही संजय यादव, तेजस्वी यादव के खास हैं।

तेजस्वी के पास टेस्ट क्रिकेट खेलने का धैर्य भी है

अपने हिटलर वाले बयान और तेजस्वी पर बिहार की जनता को बाढ़ में छोड़ दिल्ली जाने वाले बयान से तेजप्रताप ने वाहवाही जरूर बटोर ली लेकिन यह क्षणिक ही है। तेजस्वी क्रिकेट के खिलाड़ी हैं। वे वन डे खेलना जानते हैं और टेस्ट क्रिकेट वाला धैर्य भी उनके पास है। तेजप्रताप के सलाहकार कमजोर हैं। सिर्फ बयानों से राजनीति नहीं होती, इसके लिए धैर्य, संयम और अनुशासन भी चाहिए। खुद को नापना भी पड़ता है। तेजप्रताप, लालू प्रसाद के बड़े बेटे हैं और बड़े बेटे होने का बड़ा भाव उनके अंदर है।

बड़े के लिए कहा गया है- बड़े बड़ाई न करैं, बड़े न बोलें बोल, हीरा सौं मुख न कहै लाख टका मेरो मोल..। तेजस्वी यादव का पद लालू प्रसाद ने शुरू से ही बड़ा बनाया तो उसमें मेटेरियल देखा होगा। अब लोगों को हंसाने वाले लालू नहीं चाहिए, काम करने वाले लालू चाहिए। तेजस्वी इतनी सीटें सिर्फ इसलिए नहीं ला पाए कि वे लालू पुत्र हैं बल्कि इसलिए ला पाए कि उनके पास मुद्दे भी थे।

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