नए महामंत्री भीखू भाई दलसानिया की जात में उलझी बिहार BJP

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बिहार भाजपा के संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया बन चुके हैं । गुजरात से आने वाली दलसानिया की छवि बेहद कड़क नेता की है। ऐसे में बिहार भाजपा के नेता इस बदलाव को लेकर काफी माथापच्ची करते दिख रहे हैं। खासतौर से दलसानिया की जाति पता करना उनके लिए किसी पजल को सॉल्व करने जैसा हो गया है ।

जाति पता करने में लगे हैं नेता
बिहार भाजपा में इन दिनों दलनसानिया की जाति बिहार भाजपा की अंदरूनी चर्चाओं का सबसे हॉट टॉपिक है । 19 अगस्त को भाजपा के संगठन मंत्री नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को बिहार, झारखंड का क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नियुक्त कर दिया गया। अब वो रांची में रहेंगे और बिहार भाजपा में दलसानिया काल शुरू हो गया। दलसानिया भले नियुक्ति के बाद बिहार नही आयें हों लेकिन उनका नाम सामने आते हैं बिहार भाजपा में हलचल तेज हो गई है। दलसानिया के राजनीतिक करियर को जानने में बिहार भाजपा के नेताओं को ज्यादा ही मेहनत नहीं करनी पड़ रही है।

गुजरात से होने के कारण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी होने के कारण दलसानिया को बेहद आसानी से बिहार भाजपा के नेताओं ने पहचान लिया है। लेकिन, असल मुश्किल तब सामने आई जब बिहार भाजपा के नेता उनकी जाति पता करने की कोशिश करने लगे। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता नाम जाहिर नही करने की शर्त पर बताते हैं कि असल में वो पटेल हैं और ये बिहार के कुर्मी जाति के समकक्ष की जाति है।

एक दूसरे प्रवक्ता कहते हैं दलसानिया, उपनाम गुजरात में उन लोगों को हुआ करता था जो हथियार की धार तेज करने का काम करते थे। बिहार में ये काम परंपरागत तौर पर लोहार समाज के लोग करते रहे हैं । इस तरह की कई थ्योरी बिहार भाजपा के अंदर दलसानिया की जाति को लेकर चल रही हैं ।

कौन हैं भीखू भाई दलसानिया
दलसानिया के पास गुजरात में संगठन महामंत्री के पद पर काम करने का करीब डेढ़ दशक तक का अनुभव है। अगस्‍त, 2016 में आनंदीबेन पटेल के स्‍थान पर मुख्‍यमंत्री के रूप में भीखू भाई का नाम खूब चर्चा में रहा था। राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता दलसानिया सौराष्‍ट्र के प्रांत प्रचारक रहे चुके हैं । इसके बाद उन्‍हें संगठन महामंत्री का जिम्‍मा सौंपा गया था। दलसानिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी भरोसेमंद माने जाते हैं ।

बिहार की राजनीति में उनको भेजे जाने के पीछे खास वजह मानी जा रही है। लालू प्रसाद यादव के जेल से बाहर आने और मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की जाति आधारित जनगणना की मांग के बाद बिहार की राजनीति में काफी उतार-चढ़ाव आने की संभावना है। बिहार की राजनीति पर पकड़ मजबूत करने में दलसानिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं ।

जाति के जरिए नेता करीब आने की कर रहे कोशिश

असल में नेताओं की इस पूरी मशक्कत के पीछे दलसानियां से रिश्ते प्रगाढ़ करने की कोशिश है । जाति के जानकारी होने पर उस जाति के नेता उनसे अपनी नजदीकियां जता सकेंगे। भीखू भाई दलसानिया गुजरात में उस दौर में संगठन महामंत्री रहे हैं जब खुद प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। ऐसे में दलसानिया के करीब होने के मतलब है सीधे पीएम नरेन्द्र मोदी के करीब हो जाना ।

यही वजह है कि बिहार भाजपा के नेता किसी ना किसी तरह से दलसानिया से अपने-आप को जोड़ने में लगे हैं ताकि जब वो बिहार आए तो उनसे पहचान बनाने में उन्हें मुश्किल ना हो । यही नही बिहार भाजपा में संगठन महामंत्री का पद काफी प्रभावी होता है। इस पद पर आने वाला व्यक्ति सीधे तौर पर संघ का पार्टी में प्रतिनिधि होता है और उसकी पकड़ सभी महत्वपूर्ण फैसलों पर अहम होती है ।

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