पटना में रिपोर्ट आने से पहले ही कलेक्शन सेंटर पर जला दिए जाते हैं सैंपल, प्रभारी बोले-खराब हो गए थे

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अगर आप RT PCR की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं तो अलर्ट हो जाइए हो सकता है आपका सैंपल भी आगे के हवाले कर दिया गया हो। जी हां सुनने में अटपटा लग रहा होगा लेकिन पटना में कुछ ऐसा ही हो रहा है। शास्त्रीनगर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दैनिक भास्कर ने ऐसा बड़ा मामला पकड़ा है जिसमें RT PCR जांच के लिए गए सैंपल को जलाया जा रहा था। सवाल जब केंद्र की प्रभारी डॉ. फराह इम्तियाज से किया तो उनका जवाब था आज नहीं जलाया गया, पहले जलाया गया था जब सैंपल रखे रखे खराब हो गए थे। कितने सैंपल जला दिए गए इस पर दो टूक जवाब दिया कि वह छुट्टी पर चली गई थीं।

देखते ही देखते मिट गए कोरोना के सबूत

शास्त्री नगर शहरी स्वास्थ्य केंद्र पर देखते ही देखते आंखों के सामने कोरोना के सारे सबूत मिटा दिए गए। यहां जगह जगह सैंपल जलाए गए हैं इसका सबूत वहां की मिट्टी दे रही है। जले हुए सैंपल की शीशी और स्वॉब लेने वाले स्टिक जलाए गए हैं। आग की लपटों के बीच जो नाम सैंपल पर दिखाई दिए उनमें राजेश कुमार (42 साल), अंचना कुमारी (43 साल) भी शामिल हैं। ऐसे दर्जनों लोगों के नाम लिखे सैंपल कौन जला रहा है और क्यों? इस बारे में कोई भी बोलने के लिए तैयार नहीं। केंद्र की प्रभारी ऐसी घटना से इनकार करती रहीं, लेकिन भास्कर टीम ने जब मौके पर होने की बात कही तो उन्होंने जांच के लिए कुछ कर्मचारियों को फोन किया। मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने भी माना कि RT PCR के सैंपल ही हैं जो जलाए गए हैं।

सैंपल खराब हो जाते हैं, जांच से क्या फायदा

स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात लैब टेक्नीशियन ज्योति कुमारी से जब भास्कर टीम ने सवाल किया तो वह भी लीपापोती करने लगीं। ज्योति ने बताया कि कई सैंपल खराब हो जाते हैं। ऐसे सैंपल की जांच से कोई फायदा नहीं होता है। इसलिए उन्हें जला दिया जाता है। बातचीत में उन्होंने बताया कि खराब सैंपल को जलाया जाता है लेकिन बुधवार को सैंपल आग में डालने से इनकार कर दिया है।

आखिर कौन है जिम्मेदार

केंद्र की प्रभारी डॉ. फराह इम्तियाज ने कहा कि वह इसकी जानकारी एलटी से लेंगी, लेकिन एलटी ज्योति कुमारी ने कहा कि यह सब उनका काम नहीं है। RT PCR जांच में शास्त्रीनगर शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाही को लेकर केंद्र की प्रभारी और एलटी में ही मतभेद दिखाई पड़ा। दोनों के राग अलग-अलग थे। प्रभारी ने कहा वह लैब टेक्नीशियन से जानकारी लेंगी, लेकिन लैब टेक्नीशियन ज्योति कुमारी का कहना है कि उनका काम केवल रिपोर्ट तैयार करना है कि किसकी जांच हुई और कौन अनुपस्थित हुआ। कौन सैंपल जला रहा है? क्यों? ये उनका काम नहीं।

खुद को स्वस्थ्य मानिए जल गया सैंपल

कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखने पर एंटीजन और RT PCR की जांच होती है। RT PCR पर डॉक्टर के साथ जांच कराने वालों का भी पूरा भरोसा होता है। सैंपल देने के बाद संदिग्ध मरीज खुद को आइसोलेट कर लेता है। वह दवाएं भी खाने लगता है। इस बीच यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आए, तो संबंधित दवाएं के साथ ही समय-समय पर ऑक्सीजन लेवल चेक किया जाता है, रिपोर्ट निगेटिव सामान्य व्यक्ति की तरह लोग संदिग्ध भी घूमने लगता है। लेकिन, RT PCR रिपोर्ट निगेटिव-पॉजिटिव देने की जगह जला दिया जाए, तो मरीज खुद को स्वस्थ्य समझते हुए कोरोना का वाहक बनेगा। ऐसे में कोरोना की चेन टूटने की जगह लोगों के लिए जानलेवा बन जाएगी।

कोरोना का खतरा फैला रहा शहरी अस्पताल

शास्त्रीनग र का शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ लोगों की RT PCR की जांच का सैंपल ही नहीं जला रहा बल्कि कोरोना का खतरा भी फैला रहा है। हॉस्पिटल में मौजूद कर्मचारियों ने सफाई देने के लिए कहा जो जलाया जा रहा है वह सैंपल नहीं मेडिकल वेस्ट है। कर्मचारियों ने यहां तक कहा कि यह तो पहले से ही जलाया जा रहा है। ऐसा आदेश ही दिया गया है। वह कैंपस में ही पीपीई किट के साथ सभी तरह के मेडिकल वेस्ट को जला देते हैं। जलाने के लिए कौन प्रशिक्षण दिया गया है या आदेश किसका है, इस सवाल पर वह चुप्पी साध गए। कोरोना को लेकर जो गाइडलाइन है उसके मुताबिक मेडिकल वेस्टेज को एसिनेट में सुरक्षा के साथ जलाया जाना चाहिए। इसके लिए पटना के IGIMS में संगम मेडिसर्व प्रा लिमिटेड कंपनी को लगाया गया है जो अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट कलेक्ट कर उसे नष्ट करती है। इसके बावजूद PPE किट, गल्वस, मास्क, RT PCR की स्टिक, दवाओं के रैपर, प्लॉस्टिक के बोतल सहित दूसरे मेडिकल वेस्ट को जलाकर पर्यावरण से ऑक्सीजन की कमी की जा रही

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