बच्चों को कैसे बचाएंगे; 1000 वेंटिलेटर की जरूरत, 5 जिले में सिर्फ 143

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कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर खतरा हो सकता है। इस खबर से बच्चों के डॉक्टर तक सहम गए हैं। लॉकडाउन के पहले कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन, ICU और वेंटिलेटर को लेकर जो संकट दिखा, उसके कारण डर और ज्यादा है। पूरे बिहार में बच्चों के इलाज की सुविधा पटना में ही संतोषजनक है। मुजफ्फरपुर में एईएस (AES) के कारण ICU-वेंटिलेटर की सुविधा बहुत अच्छी हो गई है, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। पटना में डॉक्टर हैं तो सुविधाएं नहीं। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर खतरा आया तो एक्सपर्ट पटना में 200 समेत बिहार में 1000 वेंटिलेटर की जरूरत बता रहे, जबकि AIIMS समेत चारों बड़े अस्पतालों को मिलाकर पटना में महज 69 वेंटिलेटर हैं और बिहार के 9 बड़े अस्पतालों को मिलाकर इनकी संख्या 143 है। बेड के मुकाबले 10% वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।

इस हिसाब से बच्चों के लिए पटना में 2,000 बेड जरूरी है, जबकि हैं 330 बेड। बिहार में 10,000 बेड की जरूरत मानी जा रही है, जबकि अभी मात्र 816 बेड ही हैं। बच्चों के लिए कुल 365 आईसीयू हैं। भास्कर की ग्राउंड रियलिटी में निकले इस हिसाब में यह भी सामने आया कि बच्चों के लिए आईसीयू की सुविधा पटना समेत 6 जिलों में ही है। 38 में 32 जिलों में बच्चों के लिए ICU नहीं और 33 जिलों में वेंटिलेटर नहीं। सरकार ने पिछले हफ्ते सभी से रिक्वायरमेंट मांगी थी। इन सभी के साथ डॉक्टरों की जरूरत होगी, हालांकि एक्सपर्ट मानते हैं कि चालू वॉक-इन ड्राइव से यह मैनेज हो जाएगा।

पटना : PMCH में 200 बेड, वेंटिलेटर 16

PMCH के शिशु वार्ड में बेड तो 200 हैं, लेकिन वेंटिलेटर 16 ही हैं। यहां 200 में से 50 बेड पर ही ऑक्सीजन की व्यवस्था है। NMCH में 60 बेड हैं और वेंटिलेटर 18 हैं। IGIMS तो 40 में से 5 बेड ही वेंटिलेटर- ICU वाले हैं। AIIMS शिशु वार्ड में 30 बेड हैं और सभी वेंटिलेटर सुविधा वाले आईसीयू के रूप में कार्यरत हैं।

मुजफ्फरपुर: ICU और वेंटिलेटर की संख्या के हिसाब से सबसे मजबूत है

श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) मुजफ्फरपुर में ICU और वेंटिलेटर की संख्या के हिसाब से सबसे मजबूत है। लेकिन, यहां डॉक्टर उस हिसाब से नहीं। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी कहते हैं कि जरूरत पड़ी तो 35 बेड वाले नीकू को भी 100 बेड वाले पीकू की बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा सकता है।

दरभंगा: 100 बेड मांगे, गया का वेंटिलेटर ठप

दरभंगा के DMCH में भी 4 ही वेंटिलेटर हैं। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. KN मिश्रा ने 100 बेड तत्काल बढ़ाने की जरूरत बताई है। बेतिया GMCH कोविड डेडिकेटेड है। गया में NMCH के शिशु विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील भूषण यही बता पाते हैं कि 3 वेंटिलेटर होकर भी ठीक से नहीं चल रहे हैं।

भागलपुर: अस्पताल के चारों वेंटिलेटर खराब पड़े

भागलपुर के JLNMCH में ICU छोड़ कुल 60 बेड हैं, जिनमें 50 पर पाइपलाइन का ऑक्सीजन है। NICU 36 बेड का है, लेकिन PICU 8 बेड का ही। यहां पीकू के लिए 4 वेंटिलेटर तो हैं, लेकिन ठीक है या नहीं किसी को नहीं पता। अस्पताल अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास कहते हैं कि बच्चों के हिसाब से दवा उपलब्ध है।

वरना PICU-NICU भी जुबान पर चढ़ेंगे

पीकू- पीडिएट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) है यह। 1 महीने से बड़े और 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए यह ICU है। इसे PICU कहते हैं। यहां यूनिवर्सल वेंटिलेटर का उपयोग हो सकता है।

नीकू- नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) है यह। जन्म से 1 महीने तक के बच्चों के लिए यह ICU होती है। इसे शॉर्ट फॉर्म में नीकू कहते हैं। किसी भी ICU से यह ज्यादा संवेदनशील होती है।

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