बाइक से गुजरेंगे तो पूरा दिमाग झनझना उठेगा, कंधों में दर्द हो जाएगा; फिर भी हर दिन लाख से ज्यादा लोग गुजरते हैं

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पीपापुल हादसे में 9 लोगों की मौत के बाद लोगों का गुस्सा गंगा किनारे भड़का रहा। काफी देर तक पटना DM भी यहां नहीं पहुंचे थे, न पुलिस के बड़े अफसर। NDRF-SDRF के अफसर दल-बल के साथ मौजूद रहे। भास्कर ने भीड़ में मौजूद प्रमिला देवी से बात की तो छूटते ही उन्होंने कहा, जूता खाने वाला…..। इस पुल की वजह से काफी खतरा है। ठेकेदार और सरकार सब मिले हुए हैं। इतनी बड़ी आबादी है दियर में और किसी को परवाह नहीं है। इ सब जो हमेशा के लिए नींद में सो गए हैं ना…वे हमसब के दियारा के ही लोग हैं। देखिए तो कैसे लाश की लाइन लग गई है। कई बार हादसा हो चुका है पुल पर लेकिन किसी को सूझता नहीं है। वोट नहीं देंगे अबकी बार किसी को, बहुत जुल्म हो गया।

इस पुल पर ऐसी अनगिनत जगहें हैं, जहां नट खुले हैं।

इस पुल पर ऐसी अनगिनत जगहें हैं, जहां नट खुले हैं।

25 जगहों पर प्लेट ऊपर-नीचे हैं

पीपा पुल की क्या स्थिति है? इसकी पड़ताल जब भास्कर ने की तो पाया कि पुल पर पांच ऐसी जगहें हैं, जहां प्लेट इस तरह से टूटा हुआ है कि उससे नीचे गंगा बहती हुई दिखती है। पीपा पर रखे हुए प्लेट नट से कसे हुए हैं। लेकिन ये नट अनगिनत जगहों पर खुले हुए हैं। इससे जब भी कोई मोटरसाइकिल, कार या अन्य गाड़ियां गुजरती हैं तो बहुत आवाज आती है। पूरा पुल झकझोरने लगता है। 25 जगहों पर ऐसी स्थिति है कि प्लेट बराबर नहीं है। ऊपर और नीचे है। हद यह कि कई जगहों पर बैरकेटिंग टूटी हुई है। लोग बताते हैं कि इस पुल से हर दिन लाख से ज्यादा लोग आते-जाते हैं।

स्थानीय लोग खतरे को अपनी नियति मान चुके हैं. पुल से जाएं या नाव से, खतरा हर जगह बना रहता है।

स्थानीय लोग खतरे को अपनी नियति मान चुके हैं. पुल से जाएं या नाव से, खतरा हर जगह बना रहता है।

कई बार लोग डर से नाव की यात्रा ही करते हैं

दियारा के लोगों की त्रासदी है कि बाढ़ तो झेलते ही हैं हर साल। पीपा पुल की बदतर स्तिथि रहने से जान हथेली पर रहती है। स्थानीय राजीव कुमार बताते हैं कि कई बार तो मारे डर के हमलोग नाव से ही यात्रा करते हैं। लेकिन उससे भी कम खतरा नहीं रहता है। क्या करें, खतरा ही हमारी नियति है। पानी में डूब कर मरें या पुल से गिर कर। वे यह भी कहते हैं कि गाड़ी अनबैलेंस होने से घटना घटी है, ठीक बात है, लेकिन पुल का हालत भी देख लीजिए।

माइक देख लोगों का गुस्सा सरकार पर भड़का

भास्कर का माइक देख लोगों ने खूब नारेबाजी की। सरकार होश में आओ… के नारे लगाए। दियारा के लोगों को सुरक्षा दो… के नारे लगे। भास्कर ने यहां पहुंचे पाटलिपुत्र के सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामकृपाल यादव से पूछा- पुल का ये हाल क्यों है सांसद महोदय? उन्होंने कहा कि इतनी दुखद घटना दानापुर दियारा में उन्होंने नहीं देखी। लगातार चार-पांच वर्षों से मैं लगा हुआ हूं इस पुल को लेकर। सरकार ने आश्वासन दिया है कि नए पुल से दियारा के इस हिस्से को भी जोड़ा जाएगा।

जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, पुल सुधार कर क्यों नहीं रखते?

एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि चुनाव के समय वोट मांगने लोग आते हैं, पर जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, सरकार पुल को दुरूस्त क्यों नहीं रखती? क्यों लोगों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर भी रहा कि इतना बड़ा हादसा हो गया और दोपहर बाद तक पटना के न कोई बड़े अफसर यहां पहुंचे और न बिहार सरकार का कोई मंत्री। जबकि पटना सचिवालय से अकीलपुर की दूरी 10 किमी से कम होगी।

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