बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में विवाद क्यों?

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पारिवारिक नेतृत्व में चलने वाले राजनीतिक दलों में विरासत की जंग आम हैं। बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में इन दिनों कुछ ऐसा ही चल रहा है। विरासत की जंग खुल कर लड़ी जा रही है। कहने को तो लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव खुद को कृष्ण और तेजस्वी यादव को अर्जुन बताते हैं लेकिन जो कुछ हो रहा है वह महाभारत महाकाव्य के कृष्ण- अर्जुन की जोड़ी जैसा कतई नहीं दिखता। हां, दोनों के बीच महाभारत जरूर छिड़ी है। शुक्रवार को तेजस्वी ने तेज को अनुशासन में रहने की हिदायत दी तो शनिवार को देर शाम तेज ने उन पर निशाना साधा। उनके सलाहकार संजय यादव पर अपनी हत्या करवाने तक का आरोप मढ़ दिया।

हालांकि पिता से बात होने के बाद सुबह में तेजप्रताप ने सोशल मीडिया पर लिखा-चाहे जितना षड्यंत्र रचो कृष्ण-अर्जुन की ये जोड़ी को तोड़ नहीं पाओगे। दरअसल लालू-राबड़ी ने तेजप्रताप को दिल्ली बुलाया है। ऐसे में दिल्ली में ही तेजप्रताप विवाद का रास्ता निकलने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक लालू ने शुक्रवार रात में ही तेजप्रताप को समझा-बुझा कर शनिवार को पार्टी कार्यालय जाकर प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद से बात कर लेने की नसीहत दी थी। पर तेजप्रताप प्रदेश कार्यालय नहीं गये और सीधे पापा से दिल्ली में ही बात करने का मन बना लिया।

ऐसे में पार्टी नेताओं की निगाहें अब दिल्ली में होने वाली पिता-पुत्र के संवाद पर टिकी है कि लालू इस विवाद को किस तरह सलटाते हैं। राजद सूत्रों का दावा है कि तेजस्वी और तेजप्रताप दोनों रविवार को दिल्ली में बहनों से राखी बंधवायेंगे और लालू-राबड़ी के समक्ष तेजप्रताप-जगदानंद विवाद का हल भी निकल सकेगा। इधर, शनिवार को पटना में तेजप्रताप और जगदानंद विवाद में सीज फायर दिखा।

दिल्ली से ही लालू यादव के मनाने के बाद तेजप्रताप पटना प्रदेश राजद कार्यालय में जनता दरबार लगाने के अपने ऐलान से मुकर गये। हालांकि उनके पूर्व ऐलान को देखते हुए राजद कार्यालय के पेड स्टॉफ के अतिरिक्त कोई भी बड़ा नेता शनिवार को पहले हाफ में राजद कार्यालय नहीं पहुंचा। राजद कार्यालय के गेट में ताला भी नहीं लगाया गया। सिर्फ चेन फंसाकर तेजप्रताप का इंतजार होता रहा।

इन 7 सवालों में समझें पॉलिटिक्स…मामला क्या है?

Q. क्या इससे पहले भी इन दोनों में झगड़े हुए हैं? या किसी मुद्दे पर दोनों आमने-सामने रहे हों। पिछले 1 साल में ऐसा कितनी बार हुआ?
– ऐसा विवाद पिछले सालभर में एक बार भी नहीं हुआ है।

Q. पार्टी में दोनों की क्या स्थिति है। क्या दोनों के अलग-अलग गुट हैं? कौन से बड़े नेता किसके पक्ष में हैं और क्यों?
– तेजस्वी को लालू प्रसाद ने अपना उतराधिकारी व सीएम चेहरा बनाया है। जबकि, तेजप्रताप को छात्र राजद की कमान दी गई है। सभी बड़े नेता तेजस्वी के साथ हैं। तेजप्रताप की टीस है कि लालू के बड़े बेटे होने के नाते पार्टी में तेजस्वी जैसा तवज्जो व सम्मान नहीं है।

Q. लालू के करीबी रहे पार्टी नेता किसके ज्यादा करीब हैं। तेजप्रताप के या तेजस्वी के।
– लालू के करीबी सभी नेता तेजस्वी के साथ हैं। पर्दे के पीछे से भले ही कोई हो लेकिन सामने से तेजप्रताप के साथ कोई नेता नहीं है।

Q. तेजप्रताप या तेजस्वी- पॉलिटिकली कौन ज्यादा सक्रिय है और किसकी जमीन पर ज्यादा पकड़ है।

सक्रिय दोनों हैं। लेकिन, पार्टी का चेहरा होने के कारण तेजस्वी की जमीन पर ज्यादा पकड़ है।
Q. क्या लालू अब दिल्ली तक ही सीमित रहेंगे? अगर लालू बिहार में ज्यादा एक्टिव नहीं हैं तो उनकी जगह कौन ले सकता है?

नहीं, लालू बिहार आने की घोषणा कर चुके हैं। लालू अपनी जगह तेजस्वी को राजद का नेता तय चुके हैं। फिलहाल पिता की सहायता से तेजस्वी ही सारे राजनीतिक फैसले ले रहे हैं।

Q. कौन लोग हैं जो दोनों भाइयों के बीच फूट डाल रहे हैं?
तेजप्रताप का कहना है कि तेजस्वी के सलाहकार संजय यादव दोनों भाइयों को साथ नहीं रहने देना चाहते हैं।

Q. दोनों के झगड़े के बीच बहन की क्या भूमिका है? मीसा और रोहिनी आचार्य की क्या भूमिका है?
पूरे प्रकरण पर मीसा मौन हैं। रोहिनी मुखर हैं। रोहिनी ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा कि सफलता की मंजिल पाना है तो अनुशासन व संयम को अपनाना होगा।

इस झगड़े में किसका साथ देगा यादव परिवार

1. क्या तेजप्रताप और तेजस्वी के झगड़े की वजह बहनें हैं?
इसका कोई प्रमाणिक साक्ष्य नहीं है। विवाद का कारण लालू द्वारा संगठन और पार्टी की सरकार में आने पर उसका नेतृत्व तेजस्वी को सौंप देना है। तेजप्रताप को तेजस्वी के पद से कोई आपत्ति नहीं है पर पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच अपनी महत्ता बनाए रखने के लिए वह संगठन में कोई ऐसा बड़ा पद चाहते हैं जिससे तेजस्वी की तरह उनको तवज्जो मिले।

2. पटना से दूर बैठे लालू-राबड़ी क्या सुलह करवा पाएंगे?
हां, तेजप्रताप पिता को भगवान कहते हैं। जब-जब तेजप्रताप अपने समर्थकों के लिए टिकट या पद की मांग को लेकर बखेड़ा खड़ा करते हैं तो लालू ही समझाते रहे हैं। उसका असर भी दिखता रहा है। बड़ा बेटा होने के नाते तेजप्रताप मां राबड़ी के दुलारे हैं। चाहे तेज को मंत्री बनवाना हो या विधायक के लिए टिकट या उनके समर्थकों को पद दिलवाना हो, वे हमेशा पीछे खड़ी रहती हैं।

3. जगदानंद कहीं इस झगड़े का सिर्फ बहाना तो नहीं?
जगदानंद संगठन या पार्टी कार्यालय में तेजप्रताप की मनमानी नहीं चलने देते हैं। वहीं लालू के बड़े बेटे होने के नाते तेज इसे स्वीकार नहीं कर पाते हैं। वे चाहते है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की तरह जगदानंद भी तेजस्वी के समान उन्हें भी सम्मान दें। तेजप्रताप को यह भी लगता है कि उनके पावर को कम करने में जगदानंद की भी भूमिका है।nullखबरें और भी हैं…

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