बिहार के 3 जिलों के 138 घाटों पर बालू माफियाओं का राज; भोजपुर में पुलिस एस्कॉर्ट करती दिखी

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बिहार में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण अनिवार्य सेवाओं को छोड़कर सबकुछ लॉक है। जरूरी सेवाओं के लिए भी गाड़ी निकालने से पहले प्रशासन की अनुमति लेनी होती है। लेकिन एक धंधा ऐसा है जो तमाम पाबंदियों के बावजूद भी धड़ल्ले से जारी है। लॉकडाउन के दौरान पुलिस ही 300 करोड़ का अवैध कारोबार करा रही है।

प्रदेश के पटना, भोजपुर और सारण जिलों में पुलिस का अलग ही खेल चल रहा है। यहां पुलिस ही स्कॉर्ट देकर ट्रकों को निकाल रही है। तीनों जिले के नदियों से बालू की अवैध ढुलाई हो रही है। वह भी पुलिस की मौजूदगी में। दैनिक भास्कर ने इसका खुलासा किया है। भास्कर के रिपोर्टर को मिले दो वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस स्कॉर्ट देकर बालू की अवैध ढुलाई करा रही है।

जिन पर लॉकडाउन की जिम्मेदारी है। वे ही सुरक्षा देकर बालू का अवैध खनन के बाद उसे ट्रक के जरिए दूसरी जगह भिजवा रहे हैं। सुबह से लेकर रात और रात से लेकर सुबह तक यानी पूरे 24 घंटे इन तीन जिलों के 138 घाटों पर लगातार बालू का अवैध खान जारी है। पूरे एक साल में सिर्फ इन 3 जिलों से करीब 300 करोड़ रुपए का बालू का अवैध कारोबार चल रहा है। वो भी पुलिस ही करा रही है।

भास्कर के पास दो वीडियो फुटेज
दरअसल, भास्कर के पास लॉकडाउन के दौरान की दो अलग-अलग तारीखों के वीडियो फुटेज हैं। जिसमें तारीख के साथ-साथ समय भी है। वीडियो में खास और ध्यान देने वाली बात यह है कि अवैध खनन से निकाले गए बालू को 14 चक्के वाले ट्रक से ले जाया जा रहा है। इसमें भी होश उड़ा देने वाली बात यह है कि कानून के जिन पहरेदारों पर अवैध काम को रोकने की जिम्मेवारी है।

उसी पुलिस की गाड़ी अवैध बालू वाले ट्रक को एस्कॉर्ट करते हुए दिखती है। पूरी तरह से VIP ट्रीटमेंट पुलिस की टीम दे रही है। सवाल यह उठता है कि जब राज्य सरकार ने पूरी तरह से रोक लगा रखी है तो उसके बाद भी किसकी ताकत पर यह कारोबार फल-फुल रहा है। इस अवैध कारोबार के जरिए हर दिन राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाया जा रहा है।

8 मई को बना भोजपुर के बबुरा बैरियर में पहला वीडियो
भोजपुर जिले में बड़हरा थाना है। सोन नदी के किनारे बबुरा बैरियर का इलाका इसी थाना में आता है। भास्कर के हाथ जो पहला वीडिया लगा है। वो इसी बैरियर का है। जिसे एक शख्स ने अपने मोबाइल से बनाया है। तीन मिनट से अधिक वाले इस वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है कि लॉकडाउन होने के बाद भी कैसे अवैध खनन से निकाले गए बालू को लोड कर एक 14 चक्के वाला ट्रक जा रहा है। उसके आगे पुलिस की गाड़ी कुछ दूर तक एस्कॉर्ट करते हुए जाती है।

इसके अलावा अलग-अलग बाइक से माफिया के लोग ट्रक को एस्कॉर्ट करते दिख रहे हैं। सरकार ने पूरे बिहार में 12 चक्का और उससे अधिक के ट्रकों से बालू की ढुलाई पर बहुत पहले से रोक लगा रखी है। लेकिन, सरकारी आदेश सिर्फ कागजों में है। वीडियो कुछ और ही असलियत बयां कर रही है।

13 मई की रात का है CCTV वाला दूसरा वीडियो
भास्कर के हाथ जो दूसरा वीडियो लगा है, वो एक CCTV का है। जिसे मोबाइल में 13 मई की रात कैप्चर किया गया है। 58 सेकेंड के इस वीडियो में बाइक से आगे-आगे माफिया के दो बाइक चलते दिखे। इनके पीछे 14 चक्का का ट्रक दिखा, जिस पर अवैध खनन वाली बालू लोड थी।

पीछे से 10 चक्का का ट्रक भी बालू से लदा हुआ आते हुए दिखता है। उसी बीच पुलिस की एक जिप बहुत तेजी से पास करती है और आगे जाकर एस्कॉर्ट करते हुए दिखाई देती है।

पुलिस संरक्षण की वजह से ब्रॉडसन ने किया सरेंडर
पटना, भोजपुर और सारण जिले के 138 घाटों पर बालू के खनन का टेंडर बिहार सरकार ने ब्रॉडसन कंपनी को दिया था। इसके एवज में हर दिन 3.38 करोड़ रुपए का चालान कटवाकर सरकार को राजस्व देती थी। लेकिन, इन इलाकों में पुलिस का सरंक्षण और सुरक्षा ब्रॉडसन कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों को नहीं मिली। हमेशा गोलीबारी और मारपीट की घटनाओं की वजह से करीब 7 साल लगातार काम करने के बाद 1 मई से ब्रॉडसन ने सरेंडर कर दिया। जबकि सरकार ने उसके लीज को 6 महीने का एक्सटेंशन भी दिया था।

घाटों पर पूरी तरह से छोटे-छोटे माफियाओं के अलग-अलग कई गैंग एक्टिव हैं। जिन्हें लोकल थानों की पुलिस का पूरा संरक्षण मिला हुआ है। कानून के रखवालों की मिलीभगत की वजह से राजस्व का सीधा नुकसान बिहार सरकार को हो रहा है।

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