बिहार से दो लोगों को मिली कैबिनेट में जगह, नीतीश के करीबी RCP सिंह और LJP के बागी पशुपति पारस बने मंत्री

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में जदयू से सिर्फ आरसीपी सिंह शामिल हुए। इसके अलावा बिहार से पशुपति कुमार पारस ने भी केंद्र में मंत्री पद की शपथ ली। आरसीपी सिंह पांचवें नंबर में शपथ लेने पहुंचे और हिंदी में ही शपथ ली। वहीं, पारस ने भी हिंदी में शपथ ली।

हालांकि, जदयू की ओर से मंत्री की रेस में आगे चल रहे ललन सिंह साइड हो गए।

JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह मंगलवार सुबह से ही लगातार दिल्ली में कैंप कर रहे थे। उन्होंने मंगलवार को ही मीडिया से बात करते हुए यह साफ कर दिया था कि इस बार JDU केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होगा।

दिसंबर 2020 में नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था।

दिसंबर 2020 में नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था।

जानिए कौन हैं आरसीपी सिंह

वर्तमान में आरसीपी सिंह JDU के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। 62 वर्षीय सिंह मूल रूप से नालंदा के रहने वाले हैं, यहीं से नीतीश कुमार भी हैं। आरसीपी सिंह कुर्मी जाति से हैं और नीतीश कुमार भी कुर्मी समाज से ही आते हैं। सिंह को नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है। उनको पार्टी में नीतीश के बाद नंबर 2 का दर्जा हासिल है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले आरसीपी सिंह JDU के राष्ट्रीय महासचिव थे। साथ ही राजनीति में आने से पहले वो उत्तर प्रदेश काडर के पूर्व IAS अधिकारी रह चुके हैं।

कैसे बने आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के करीबी

बताया जाता है कि 1996 में जब नीतीश कुमार केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई सरकार में मंत्री थे तो उसी दौरान उनकी नजर आरसीपी सिंह पर पड़ी। इस दौरान आरसीपी सिंह केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सचिव थे। इसके बाद नीतीश कुमार जब रेल मंत्री बने तो उन्होंने अपना विशेष सचिव बनाया। 2005 में जब बिहार विधानसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने आरसीपी सिंह को दिल्ली से बिहार बुला लिया। 2005 से 2010 के बीच आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के प्रधान सचिव रहे। इस दौरान पार्टी में आरसीपी सिंह की पकड़ मजबूत होने लगी।

JNU से ली उच्च शिक्षा

आरसीपी सिंह ने 2010 में भारतीय प्रशासनिक सेवा से वीआरएस के तहत स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। इसके बाद नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को राज्यसभा भेज दिया। उन्‍होंने उच्‍च शिक्षा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से ग्रहण की है।

दो बेटियों में एक IPS

आरसीपी सिंह का जन्‍म बिहार के नालंदा जिले के मुस्‍तफापुर में 6 जुलाई 1958 में हुआ था। उन्‍होंने पटना साइंस कॉलेज से बीए, इतिहास (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्‍त की। हाईस्‍कूल की पढ़ाई नालंदा जिले के हुसैनपुर से की है। 1982 में उनकी शादी गिरिजा देवी से हुई है। 1984 में उन्‍होंने UPSC की प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल की। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी लिपि सिंह 2016 बैच की IPS अधिकारी हैं।

तस्वीर लोकसभा चुनाव 2019 की है। इसमें तब रामविलास पासवान ने भाई पशुपति पारस के लिए वोट मांगा था।

तस्वीर लोकसभा चुनाव 2019 की है। इसमें तब रामविलास पासवान ने भाई पशुपति पारस के लिए वोट मांगा था।

1977 में पहली बार विधायक बने थे पारस

पहली बार 1977 में वे विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुए थे। उन्‍होंने जेएनपी उम्‍मीदवार के रूप में जीत हासिल की। इसके बाद लोक दल, जनता पार्टी से विधायक चुने जाते रहे। रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी बनाई तो वे इसके विधायक चुने गए। सन 2019 में लोजपा के टिकट पर सांसद निर्वाचित होने से पहले वे पांच बार विधायक रह चुके हैं। नीतीश कुमार की सरकार में उन्‍होंने पशु एवं मत्‍स्‍य संसाधन विभाग का मंत्री पद संभाला। तीन भाइयों में सबसे छोटे पशुपति कुमार पारस बड़े भाई के साथ राजनीति की बारीकियां सीखते रहे।

अचानक सुर्खियों में आए पारस

राजनीति में अचानक सुर्खियों में पारस तब आए जब उन्‍होंने लोजपा का तख्‍तापलट कर दिया। उन्‍होंने पार्टी के पांच सांसदों के साथ बगावत कर दी। चिराग पासवान को नेता मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद वे लोजपा के अध्‍यक्ष चुने गए। हालांकि इस राजनीतिक घटनाक्रम का पटाक्षेप अभी नहीं हो सका है। क्‍योंकि चिराग पासवान ने खुद को लोजपा का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बताते हुए पारस समेत सभी पांच सांसद को पार्टी से निलंबित कर दिया है। उन्‍होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर लोजपा सांसद के रूप में पारस को केंद्र में मंत्री बनाया जाता है तो वे कोर्ट जाएंगे।

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