महात्मा गांधी को बिहार लाने वाले का गांव बहा

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बेतिया में लगातार दूसरी बार बाढ़ के कारण चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता और स्वतंत्रता सेनानी राजकुमार शुक्ल का मुरली भरहवा गांव डूब गया है। पंडई नदी में उफान के कारण गांव में घर-बार डूब चुके हैं। बाढ़ से कुल 250 घर बाढ़ के पानी में बह गए हैं। लोग किसी तरह अपने घरों से निकलकर पलायन कर रहे हैं। यहां सीने तक पानी है और घर पानी में बह रहे हैं। इस गांव के लिए यह तबाही नई नहीं है। पिछले साल भी बाढ़ में ऐसा ही हुआ था। इससे पहले वर्ष 2017 में भी बाढ़ से गांव तबाह हो चुका है।

बेतिया में लगातार हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। गांव में कहीं कमर भर तो कहीं छाती भर पानी बह रहा है। गांव के लोग दहशत में हैं और ऊंचे स्थान के लिए पलायन कर रहे हैं। गौनाहा का मुरली भरहवा गांव बाढ़ के चपेट में पूरी तरह से आ चुका है, लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा लोगों तक कोई मदद नहीं पहुंच पाई है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि 2 दिनों से नेपाल की पहाड़ियों पर बारिश होने के कारण पंडई नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसलिए नेपाल से सटे बेतिया के गौनाहा प्रखंड के कई गांव बाढ़ के चपेट में आ चुके हैं। अगल-बगल के कई गांव में बाढ़ का पानी घुस चुका है। गांव में कहीं कमर भर तो कहीं छाती भर नदी बह रही है।

जिले में आई बाढ़ ने ऐसी बर्बादी और तबाही मचाई है कि लोग बेबस और लाचार हो गए हैं। आलम यह है कि बाढ़ की विभीषिका झेलने वाले लोग अपनी बेबसी पर आंसू बहाने को मजबूर हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन ने इनकी सुध नहीं है। गौनाहा प्रखंड के कई गांव को हर साल पंडई नदी की मार झेलनी पड़ती है। कई गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं। इसके बाद सैकड़ों परिवारों को कई महीने सड़क किनारे खानाबदोश की जिंदगी बितानी पड़ती है।

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