मुंगेर खानकाह में सुपुर्द-ए-खाक हुए वली रहमानी,सम्मान में 10 राइफलें आईं, चलीं 4

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इमारत-ए-शरिया के अमीर-ए-शरियत हजरत मौलाना वली रहमानी सुपुर्द-ए-खाक हो गए। मुंगेर के खानकाह रहमानिया में उन्हें दोपहर 2 बजे दफन किया गया। उनकी आखिरी जियारत (अंतिम दर्शन) के लिए करीब 5 लाख लोगों की भीड़ जुटी थी। सरकारी आदेश के मुताबिक राजकीय सम्मान के साथ हजरत वली रहमानी का अंतिम रस्म अदा करना था, लेकिन एकबार फिर सरकारी बंदूक मिसफायर हो गई।

जगन्नाथ मिश्र की अंत्येष्टि में भी नहीं हो पाया था फायर

दो साल पहले जगन्नाथ मिश्र को गार्ड ऑफ ऑनर देते वक्त पुलिस की फजीहत हुई थी, जब 21 राइफलों में से एक भी नहीं चली थी। इस बार भी काफी फजीहत का सामना करना पड़ा है। हजरत मौलाना वली रहमानी को खानकाह परिसर में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दफन किया गया। जनाजे की नमाज के पहले मुंगेर DM, DIG और SP ने पहले उनके जनाजे पर तिरंगा ओढ़ाया, उसके बाद फूल-माला चढ़ाया, उसके बाद उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया। खानकाह परिसर में ही उन्हें उनके दादा और उनके अब्बा के मजार के पास दफनाया गया। राजकीय सम्मान दिए जाने के दौरान जवानों की राइफल ही फंस गई। सिविल जमादार ने शोक सलामी के लिए जवानों को आदेश दिया ही था कि तभी सभी पुलिस जवानों की राइफलें फंस गईं और आसमानी फायरिंग नहीं हो पाई। कुछ समय के बाद राइफल को ठीक करके बाद किसी तरह से 10 में से मात्र 4 राइफलों से सलामी दी गई। मौके पर मौजूद मुंगेर के DM, DIG, SP मूकदर्शक बनकर देखते रह गए।

राजकीय सम्मान के दौरान नहीं चलीं राइफलें।

राजकीय सम्मान के दौरान नहीं चलीं राइफलें।

कोरोना पर भारी पड़ी अकीदत
हजरत वली रहमानी की डेड बॉडी पटना से देर रात मुंगेर खानकाह रहमानी पहुंची। उनका जनाजा मुंगेर पहुंचने के बाद उनकी आखिरी जियारत (अंतिम दर्शन) करने के लिए लोगों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि कोरोना पर अकीदत भारी पड़ गई। सड़क से लेकर खानकाह तक तिल रखने की जगह तक नहीं बची थी।

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