रेमडेसिविर इंजेक्शन ब्लैक से 60 हजार तक में नहीं मिल रही

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सरकारी दावे में रेमडेसिविर की कोई कमी नहीं है। हर दिन इंजेक्शन की खेप आ रही है, लेकिन जमीनी हकीकत दावों की पोल खोल रही है। इंजेक्शन कहां और कैसे मिल रही है, इसकी कहानी वही जान सकता है जो डॉक्टर का पर्चा लेकर भटका होगा। शनिवार तक प्रदेश में लगभग 30 हजार रेमडेसिविर की खेप आ चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी मरीजों की डिमांड पूरी नहीं हो पाई। हर दिन इंजेक्शन की खेप BMSICL और दवा एजेंसियों को आ रही है, इसके बाद भी मरीजों को ब्लैक में इंजेक्शन लेना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती हर पांचवें संक्रमित के लिए रेमडेसिविर की डिमांड है, जो सरकारी व्यवस्था से पूरी नहीं हो रही है।

सरकार का दावा फिर भी ब्लैक

रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर सरकार ने दावा किया है कि इसकी कोई कमी नहीं है। सरकार के दावे के मुताबिक 30 अप्रैल तक BMSICL के पास 92 सौ वायल था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ANMCH गया को 200, NMCH पटना को 200, JLNMCH भागलपुर को 200, DMCH दरभंगा को 100, PMCH पटना को 400, SKMCH मुजफ्फरपुर को 100, ESIC बिहटा को 50 और IGIMS को 100 वायल इंजेक्शन दिए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश के सभी सिविल सर्जन को भी इंजेक्शन एलॉट किए गए हैं। सिविल सर्जन पटना को 3000, सिविल सर्जन मुजफ्फरपुर को 400 वायल के साथ आवश्यकता के अनुसार प्रदेश के अन्य सिविल सर्जनों काे 50 से लेकर 200 तक इंजेक्शन दिए गए हैं। इसके बाद भी मरीजों को इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। एक एक इंजेक्शन के लिए मरीज के परिजन भटक रहे हैं। एक-एक डोज के लिए 50 से 60 हजार रुपए लिए जा रहे हैं। अब सवाल यह है कि जब सरकार आपूर्ति करा रही है तो फिर ब्लैक मार्केटिंग कैसे हो रही है।

रेमडेसिविर को लेकर हाहाकार

देश के साथ बिहार में भी रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हाहाकार मच गया है। 3 हजार के इंजेक्शन के लिए 30 हजार रुपए वसूले जा रहे हैं। ब्लैक मार्केटिंग ऐसी हुई कि ड्रग कंट्रोलर को एजेंसियों पर निरीक्षकाें को बैठाना पड़ रहा है। एक इंजेक्शन के लिए सिफारिश की पूरी लाइन लग जा रही है। सरकार भी इंजेक्शन को लेकर परेशान है। स्वास्थ्य मंत्री को बताना पड़ रहा है कि इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। मुश्किलों के बीच बिहार सरकार लगातार मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन मुहैया कराने का दावा कर रही है।

मरीजों की मजबूरी का सौदा

रेमडेसिविर इंजेक्शन की पर्याप्त डोज का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन मरीजों की मजबूरी भी इस इंजेक्शन को लेकर है। बाजार में पर्चा लेकर भटकते मरीजों के परिजनों की डिमांड क्यों नहीं पूरी हो पा रही है। यह बड़ा सवाल है। पटना से लेकर प्रदेश के अन्य इलाकों में मरीजों की मजबूरी का सौदा किया जा रहा है। परिजन बाजार में भटकते हैं तो उन्हें 60 हजार रुपए में एक वायल दी जाती है और ऑनलाइन मदद मांगते हैं तो ठगी हो जाती है। पटना में ऐसे नंबर वायरल हो रहे हैं जो मदद के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे हैं।खबरें और भी हैं…

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