शहाबुद्दीन के निधन से MY समीकरण को बड़ा झटका,पत्नी हिना को राज्यसभा भेज सकता है RJD

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शहाबुद्दीन पर हत्या से लेकर अन्य कई गंभीर आरोप थे लेकिन वे बिहार में मुस्लिम राजनीति की ताकतवर धुरी थे। लालू प्रसाद ऐसे ही उन्हें अपना छोटा भाई नहीं कहते थे और लाख आलोचनाओं के बावजूद पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए हुए थे। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक का टिकट लालू प्रसाद ने उन्हें दिया। युवा राष्ट्रीय जनता दल से उन्हें राजनीति में इंट्री मिली और लालू प्रसाद ने 1990 में विधानसभा का टिकट दिया।1996 में लोकसभा का टिकट लालू प्रसाद ने दिया और वे सांसद भी बन गए। सच यह है कि नीतीश कुमार ने भी मुस्लिम राजनीति की, लेकिन उन्हें इस कद का कोई मुस्लिम नेता नहीं मिला।

RJD में थे ये दो दबंग, जिनकी राय टिकट बंटवारे में लालू मानते थे
लालू प्रसाद ने शासन करने के लिए यादव वोट के साथ मुस्लिम वोट बैंक को जोड़कर राजनीति की। उनका दिया MY समीकरण खूब पॉपुलर हुआ। दोनों जातियों को जोड़ने पर उनका वोट बैंक 32-33 फीसदी से ऊपर चला जाता है। लालू प्रसाद की मुस्लिम राजनीति को अररिया और उससे जुड़े पश्चिम बिहार में तसलीमुद्दीन संभालते थे और सीवान वाले इलाके यानी पूर्वी बिहार के इलाके को शहाबुद्दीन। लालू प्रसाद ने मुस्लिम नेताओं में पढ़े लिखे प्रो. जाबिर हुसेन को भी तरजीह दी और तनवीर हसन को भी। इन दोनों की छवि के उलट शहाबुद्दीन और तसलीमुद्दीन की छवि थी। ये दोनों दबंग थे। टिकट बंटवारे में भी इन दोनों की राय मानते थे लालू प्रसाद। दोनों अपने इलाके के रॉबिनहुड थे। तसलीमुद्दीन का निधन 17 दिसंबर 2017 को हो गया और शहाबुद्दीन 2021 में नहीं रहे। यानी लालू प्रसाद ने मुस्लिम राजनीति के दो धुरंधरों को खो दिया। इन दोनों से बड़ा दबंग मुस्लिम नेता बिहार की किसी पार्टी में नहीं। शहाबुद्दीन पर हत्या जैसे आरोप तो तसलीमुद्दीन पर अपहरण और पशुओं की तस्करी के गंभीर आरोप।

बाहुबली की पत्नी के खिलाफ बाहुबली की पत्नी को उतारा
शहाबुद्दीन को जेल की सजा हुई तो लालू प्रसाद ने उनकी पत्नी हिना शहाब को लोक सभा चुनाव का टिकट दिया। लेकिन वह चुनाव हार गई। नीतीश कुमार ने राजनीतिक स्तर पर शहाबुद्दीन की राजनीतिक ताकत को कमजोर कर RJD की मुस्लिम राजनीति को भी कमजोर करने की कोशश की। यहां से नीतीश कुमार ने JDU की कविता सिंह को टिकट दिया था जो पहली बार सांसद बनीं। बाहुबली की पत्नी के जवाब में बाहुबली की पत्नी को नीतीश कुमार ने उतारा। विधायक जगमातो देवी के निधन से खाली हुई सीट पर उनके बाहुबली बेटे की शादी खरमास के समय कराकर नई नवेली कविता सिंह को टिकट दिया गया था। वह विधायक बनी थी। उसी विधायक कविता सिंह को सीवान से JDU का टिकट दिया गया था। वह लोकसभा चुनाव जीती। बिहार की राजनीति में इस तरह से महिला सशक्तीकरण हुआ !

लालू-नीतीश की खींचतान में ओवैसी की पार्टी 5 सीट जीत गई
बिहार में लालू प्रसाद की तरह नीतीश कुमार ने भी मुस्लिम राजनीति की। उन्होंने अली अनवर को राज्य सभा भेजा था। इस बार के विधान सभा चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी ने 11 मुसलमानों को टिकट दिया पर उसमें एक भी नही जीते। बाद में नीतीश कुमार ने बसपा से जीते मुस्लिम नेता आजम खान को अपनी पार्टी में शामिल कर मंत्री बनाया। RJD ने विधान सभा में 17 मुस्लिमों को टिकट दिया और उसमें से 8 जीते। दिलचस्प यह कि बिहार में लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के बीच राजनीतिक वोट बैंक अपनी तरफ करने की कोशिश में दो बिल्लियों की लड़ाई वाली कहानी दिखी। तीसरे ने बड़ा फायदा ले लिया। ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 6 मुसलमानों को टिकट दिया और उसमें 5 जीत गए। माले से एक और बसपा से एक जीते। कांग्रेस ने 10 मुसलमानों को टिकट दिया जिसमें 4 जीते। इस तरह अभी बिहार विधान सभा में 19 मुस्लिम विधायक हैं। मंत्रिमंडल में मुसलमानों की भागीदारी दिखाने के लिए शाहनवाज हुसैन को मंत्री बनाया गया। वे एमएलसी भी बनाए गए।

केन्द्र में मुस्लिम राजनीतिः हिना को राज्यसभा भेज सकती है RJD
केन्द्र में बिहार से मुस्लिम राजनीति की दखल पर बात करें तो लालू प्रसाद की पार्टी RJD ने कटिहार के अशफाक करीम को राज्यसभा भेज मुस्लिम राजनीति की। लोकसभा में बिहार से अभी खगड़िया सीट से महबूब अली कैसर LJP के सांसद हैं। किशनगंज से कांग्रेस के डॉ.जावेद अहमद सांसद हैं। मीसा भारती के लोकसभा चुनाव हारने के बाद लालू प्रसाद ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया था। बहुत संभव है हिना साहिब को भी RJD राज्यसभा भेज दे। इससे शहाबुद्दीन के गुजर जाने के बावजूद उनका आर्थिक साम्राज्य RJD को ताकत देता रहेगा !

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