शहाबुद्दीन के मरने के बाद RJD की बेरुखी से टूटेगा बड़ा वोट बैंक, सीवान से हो सकती है इसकी शुरुआत

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शहाबुद्दीन के समर्थकों ने दिल्ली में पूरी ताकत लगा दी, लेकिन साहेब की डेड बॉडी नहीं दी गई। समर्थक उनकी डेड बॉडी सीवान ले जाना चाहते थे। उनके पुत्र ओसामा सहित बाकी समर्थकों ने भी उन्हें मार डालने का आरोप शासन-प्रशासन पर लगाया था, जिसके बाद पोस्टमार्टम कराया गया। शहाबुद्दीन की मौत के बाद RJD के अंदर उठा बवंडर बता रहा है कि अब MY समीकरण का M अपनी पसंदीदा पार्टी का साथ छोड़ सकता है।

RJD के खिलाफ भड़के हुए हैं समर्थक
शहाबुद्दीन के समर्थकों ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाया कि जब मुस्लिम वोट बैंक की जरूरत होती थी तब RJD शहाबुद्दीन का भरपूर उपयोग करती थी, लेकिन जब वे नहीं रहे तब उनके साथ ज्यादती की गई। सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों का गुस्सा खूब दिख रहा है। एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें एक समर्थक तेजस्वी यादव को काफी भला-बुरा कह रहा है। वह यह भी कह रहा है कि सीवान से ही RJD के खात्मे की शुरुआत होगी। आरोप यह भी तेजस्वी यादव, शहाबुद्दीन का हालचाल लेने भी नहीं आए। इन आरोपों के बीच बिहार विधान परिषद् के पूर्व सभापति सलीम परवेज ने RJD से त्यागपत्र दे दिया। सलीम परवेरज कहते हैं कि जिस RJD का सबसे बड़ा वोट बैंक मुस्लिम समाज रहा उसके इतने बड़े नेता को देखने की जरूरत न तेजस्वी यादव ने महसूस की और न मीसा भारती ने। आने वाले समय में मुस्लिम वोट बैंक का टूटना तय है। हमारे साथ छल किया गया है। पांच किमी. के दायरे में रहने के बावजूद लालू परिवार से कोई देखने नहीं आया। उन्होंने कहा कि पत्रकार रोहित सरदाना का पार्थिव शरीर हरियाणा ले जाया जा सकता है तो शहाबुद्दीन का पार्थिव शरीर सीवान क्यों नहीं ले जाया जा सकता था ? अहमद पटेल के निधन पर कांग्रेस के नेता खड़े रहे लेकिन लालू परिवार से कोई भी शहाबुद्दीन को देखने नहीं आया।

तेजस्वी की सफाई
हालांकि तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर बताया कि ‘ उन्होंने और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद ने शहाबुद्दीन को सीवान में सुपुर्द-ए- खाक करने के लिए तमाम कोशिशें की, लेकिन सरकार ने इजाजत नहीं दी।’

अन्य पार्टी में जगह तलाश रहा 16 फीसदी वोट बैंक !
बिहार में मुसलमानों का वोट बैंक 16 फीसदी है। यह वोट बैंक, लालू प्रसाद का वोट बैंक माना जाता है। शहाबुद्दीन की मौत, उस पर उठते सवाल और लालू परिवार में से किसी को उन्हें देखने नहीं जाना ये सारी बातें एक साथ मिलकर 16 फीसदी को सोचने पर मजबूर कर रही हैं। इस वोट बैंक पर नीतीश कुमार की नजर है। मुसलमानों का गुस्सा नया स्पेस तलाश रहा है।

प्रशासन ने कोरोना गाइडलाइन का पालन किया
कोरोना गाइड लाइन की वजह से शहाबुद्दीन को दिल्ली से बाहर ले जाने की अनुमिति प्रशासन ने नहीं दी। वे सजायाफ्ता थे इसलिए भी प्रशासन को आशंका रही कि उनके समर्थक डेड बॉडी सीवान ले जाने के बजाय बड़ा बवाल कर सकते हैं। ब्रह्मेश्वर मुखिया की डेट बॉडी आरा से पटना लाने पर क्या हुआ था इसकी याद प्रशासन को थी। उनके समर्थक उनको राजकीय सम्मान देने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार के विवेक ने माना उन्हें राजकीय सम्मान नहीं देना चाहिए।

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