57 लाख की लूट का मामला गबन का निकला,बंगाल की कंपनी का पैसा हड़पने के लिए स्टाफ ने रची थी साजिश

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पटना में 57 लाख रुपए की लूट का मामला गबन का निकला। पश्चिम बंगाल की कंपनी के रुपए का गबन करने के लिए पटना ऑफिस में काम करने वाले स्टाफ ने अपने दोस्त के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी। इसमें स्टाफ ने 40 लाख रुपए अपने पास रखे थे। जबकि, 15 लाख से अधिक रुपए उसने दोस्त को दे दिए। मामले की जांच करते हुए गुरुवार को पटना पुलिस ने न सिर्फ इसका खुलासा किया, बल्कि कंपनी का रुपए गबन करने वाले स्टाफ रवि भास्कर को गिरफ्तार भी किया।

कदमकुआं में बुद्ध मूर्ति के पास के एक लॉज से 40 लाख रुपए भी बरामद किए हैं। इस लॉज में रवि भास्कर का एक भाई रहता है। रुपए बैग में रखकर इसी के कमरे में छिपाए गए थे। गिरफ्तार रवि बाढ़ में NTPC थाना क्षेत्र के रैली गांव का रहने वाला है।

B.ED कर चुका रवि करीब डेढ़-दो सालों से दुर्गापुर की स्टील कंपनी अंकित मेटल एंड पावर लिमिटेड के लिए पटना में काम कर रहा है। एग्जीबिशन रोड के आनंद टावर में थर्ड फ्लोर पर इसका ऑफिस है। कंपनी ने कैश कलेक्शन की जिम्मेदारी इसी को दे रखी थी।

पटना के SSP उपेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि पिछले साल नवंबर में इसने ऐसी ही एक घटना की थी। कंपनी को बता दिया था कि ऑफिस में घुसकर अपराधियों ने करीब 40 लाख रुपए लूट लिए हैं। जबकि, न तो कोई लूट हुई थी और न ही उसकी कोई FIR दर्ज करवाई गई थी। इस बार भी ये लोग कोई FIR नहीं करवाने वाले थे। पुलिस एक सप्ताह से शिकायत मिलने का इंतजार कर रही थी। हालांकि, जांच में पुलिस इस केस का रिजल्ट पहले ही निकाल चुकी थी। इंतजार सिर्फ शिकायत का था। 8 सितंबर को रवि भास्कर के बयान पर ही लूट की धाराओं में FIR दर्ज हुई और फिर उसे ही कस्टडी में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस को मिले सबूतों को देख उसने जुर्म कबूल कर लिया। उसकी निशानदेही पर ही रुपए बरामद किए गए।

1 सितंबर की शाम 7 बजे SSP को आया था कॉल

पूरा मामला 1 सितंबर का है। SSP ने बताया कि शाम 7 बजे के करीब तीसरे व्यक्ति ने कॉल कर आनंद टावर में 57 लाख रुपए के लूट की जानकारी दी थी। बताया था कि वारदात शाम से पहले 3:50 बजे के करीब की है। इसके बाद SSP और उनकी टीम मौके पर पहुंची। ऑफिस से लेकर बिल्डिंग के पूरे कैंपस को खंगाला। लिफ्ट और सीढ़ी के जरिए दो रास्ते हैं। हर फ्लोर पर CCTV लगा मिला। इसमें कुछ खराब भी थे। पुलिस की पूछताछ के दौरान कैंपस में मौजूद लोगों ने कैश लूट की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया था। इससे पुलिस का शक गहराया। फिर कैंपस के अंदर और बाहर लगे हर एक CCTV के फुटेज को खंगाला। इसी में पुलिस के हाथ एक बड़ा क्लू लगा। कैश कलेक्ट कर जिस वक्त रवि भास्कर आया, उसी दौरान उसका दोस्त भी वहां पहुंचा था। सीढ़ी के रास्ते वो थर्ड फ्लोर पर पहुंचा। कंपनी के ऑफिस में घूसा और कुछ देर बाद ही एक बैग को कंधे पर टांगे निकल गया। नीचे गया और बड़े आराम से पैदल ही एग्जीविशन रोड से जमाल रोड होते हुए ऑटो में जाकर बैठा और निकल गया। ये क्लू पुलिस के लिए बड़ा हथियार साबित हुई।

पुलिस के काउंटर सवालों में उलझ गया रवि

इस मामले के शुरुआत में ही रवि भास्कर ने पुलिस को बताया था कि जब वो कैश लेकर ऑफिस आया तो पीछे से दो-तीन की संख्या में अपराधी आए। धक्का देकर अंदर किया। अपने पास से शराब की बोतल को निकला, उसे फोड़ा। शराब को मेरे शरीर पर डाला। फिर कहा कैश दो, वरना आग लगा देंगे। इससे डर गए और कैश दे दिए। जबकि, CCTV में अपराधियों और कैश लूट से जुड़ा कोई सबूत नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने सवाल किया था कि खुद से सूचना क्यों नहीं दी? दो-तीन घंटे सूचना देने में क्यों बिताया? इसका सही जवाब रवि भास्कर के पास नहीं था। शराब बंदी का बहाना बनाने लगा था। वो कहने लगा कि शराब की वजह से पुलिस उसे ही पकड़ लेती। जबकि, पुलिस को इस मामले की जानकारी बिल्डिंग के केयर टेकर से मिली थी। अब पुलिस को इस मामले में रवि के फरार दोस्त की तलाश है। इसके नाम और पहचान को पुलिस ने अभी जाहिर नहीं किया है। SSP के अनुसार उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है।

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