BJP बोली-संक्रमण कम हो रहा है,मंदिर खोले,JDU ने कहा-भाजपा शासित असम में भी बंद है कामाख्या का दरबार

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बिहार में 10वीं से ऊपर के स्कूल-कॉलेज खोलने के साथ ही अब मंदिरों को भी अनलॉक करने की मांग उठने लगी है। मंदिर खोलने पर दोनों सत्ताधारी पार्टियां भाजपा और जदयू आमने-सामने है। भाजपा ने जहां संक्रमण कम होने का हवाला दिया है तो जदयू ने असम का उदाहरण सामने रख दिया है।

4 मई से कोरोना संक्रमण के कारण मंदिर बंद हैं। संक्रमण की दर कम होने के बाद सरकार ने कई चरणों में अनलॉक किया है। अब बाजार, शिक्षण संस्थान और दफ्तर सब खुल चुके हैं, लेकिन मंदिर के साथ ही सभी धार्मिक स्थल भक्तों के लिए बंद हैं। भक्त नहीं तो मंदिरों में चढ़ावा भी बंद है और हालत यह है कि बड़े-बड़े मंदिरों की वित्तीय स्थिति बेपटरी हो चली है।

एक आकलन के मुताबिक, बिहार के 4500 निबंधित मंदिरों को बीते 3 महीने के लॉकडाउन में 40 करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि, मंदिरों के अंदर भगवान की आरती और पूजा हो रही है, लेकिन भक्तों के लिए गेट बंद होने की वजह से दान बंद हो गया है।

भाजपा की मांग पर JDU दिला रही असम की याद

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा- ‘हमारी मांग है कि जब सब कुछ खुल चुका है तो मंदिर भी खोला जाएं।’ प्रेमरंजन पटेल से पहले भाजपा के राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ये मांग रखी थी।

जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा- ‘मांग करने वालों को यह समझना चाहिए कि बिहार में सिर्फ मंदिर ही नहीं, सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। असम में भी माता कामाख्या का दरबार बंद है। वहां चुनाव भी हुए, सरकार भी बन गई, लेकिन मंदिर नहीं खुला।’ जदयू की तरफ से असम का उदाहरण इसलिए दिया जा रहा, क्योंकि असम में भाजपा की सरकार है।

सिर्फ महावीर मंदिर को साढे़ 4 करोड़ का नुकसान

लॉकडाउन के बाद से पटना का महावीर मंदिर बंद है। भक्तों के लिए 73 दिन से मंदिर के दरवाजे बंद हैं। मंदिर का संचालन करनेवाली ट्रस्ट के प्रमुख आचार्य किशोर कुणाल के मुताबिक, दान और प्रसाद बिक्री के माध्यम से प्रतिमाह मंदिर को लगभग डेढ़ करोड़ की आय होती है। इस तरह से अब तक मंदिर को साढ़े 4 करोड़ का नुकसान हो चुका है।

महावीर मंदिर ट्रस्ट के जरिए 5 अस्पतालों को संचालित किया जाता है। इसमें से एक महावीर कैंसर संस्थान के अलावा बाकी सभी अस्पतालों को ट्रस्ट की तरफ से 2 करोड़ का अनुदान दिया गया है। कोरोना के कारण इन अस्पतालों की भी वित्तीय स्थिति चरमरा गई है। आचार्य किशोर कुणाल भी कहते हैं कि मंदिरों को कोरोना प्रोटोकॉल के साथ खोला जाना चाहिए।

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